नृत्य में श्रीराम का चरित्र वर्णन, तो भक्ति संगीत से राममयी हुआ वातावरण

सतना :मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन सतना के सहयोग से भरत घाट चित्रकूट में श्रीरामनवमीं के पावन अवसर पर एक दिवसीय ‘प्राकट्य पर्व’ का आयोजन शुक्रवार को किया गया। मध्यप्रदेश के सुविख्यात कलाकारों ने विविध कलानुशासनों में श्रीराम की महिमा को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत कर प्राचीन एवं पवित्र घाट को दिव्यता से आलोकित कर दिया। इस अवसर पर पहली प्रस्तुति बघेली लोकगायन की रही, जिसे सुश्री स्नेहा मिश्रा एवं साथी, मऊगंज ने प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रस्तुति का प्रारंभ गणेश वंदना गणपति आन पधारो……… गीत के साथ किया। इसके बाद श्रीराम जन्म का सोहर गीत प्रस्तुत किया।

अगले क्रम में बधाई गीत जन्मे है राम रघुराईया, बरुआ गीत मोरे राम रिसाने जाय, फुलवारी सीता राम मिलन गीत देख कर राम जी को जनक नंदनी, जेवनार वेलन हाई एजी राजा जनक जी के चढ़ा रे करहवा, भोजन गीत जै बोलो सीता राम जनक मंदिर, गैलहाई गीत मोरे राम के कोमल पाव ककड़ गड जैहै वनवास गीत वन का चले रघुराई की कोई समुझाई एवं अंत में मृग वध गीत सोक मृगा मरण को चले भगवान सीता को छोड़े पंचवटी से प्रस्तुति को विराम दिया।

अगली प्रस्तुति में श्रीराम की महिमा को नृत्यनाटिका के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। डॉ. तरुणा सिंह एवं साथी, ग्वालियर द्वारा श्रीराम केन्द्रित नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी गई। उन्होंने सर्वप्रथम नृत्य के माध्यम से राम चरित्र का वर्णन किया, जिसमें उनका मर्यादित आचरण, विनम्रता एवं महानता शामिल थी। इसके बाद एकल नृत्य नाटिका अहिल्या उद्धार, शबरी, द्रौपदी वस्त्रहरण इत्यादि को जीवंत कर दिया। अंत में हनुमान चालीसा के साथ नृत्यनाटिका का समापन हो गया।

कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति सुविख्यात भजन गायक शर्मा बंधु, उज्जैन की रही। दुनिया भर में अपने भजनों के लिए विख्यात शर्मा बंधुओं ने चित्रकूट के पवित्र घाट को अपने भजनों से राममय कर दिया। उन्होंने सर्वप्रथम प्रभु श्री राम जन्म का गीत सुनाया, जिसके बोल गाओ गाओ रे बधाई सब मिलके, आया जनम दिन रघुवर का थे। इसके बाद श्री रामचंद्र पालु भजमन हरण भव भय दारुनं. जैसा लोकप्रिय भजन मधुर आवाज में आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। अगले क्रम में रुचिर रसना तू राम राम क्यों ना रटत………. हनुमान जी, कभी मेरे घर भी पधारो३., भोले बाबा तव शरणम, जय महाकालेश्वर तव शरणम…., कण कण में मेरे राम, जो भजे वो जाने३. एवं अंत में जिसको राम नाम रटना पसंद है उसको हर घड़ी आनंद ही आनंद है…. प्रस्तुत कर विराम दिया। शर्मा बंधुओं में राजीव शर्मा, पंडित मुकेश शर्मा, पंडित शैलेश शर्मा एवं पंडित मिथिलेश शर्मा ने प्रस्तुति दी।

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