ट्रंप के हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की समय सीमा बढ़ाने के बाद तेल की कीमतों में गिरावट

वॉशिंगटन, 27 मार्च (वार्ता) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को हॉर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोलने के लिए दी गयी समय सीमा टालने के बाद शुक्रवार को तेल की कीमतों में गिरावट आयी।

वहीं दूसरी ओर अमेरिका के विरोधाभासी संकेतों और अनिश्चित स्वभाव के कारण निवेशकों के अत्यधिक सावधानी बरतने से शेयरों में गिरावट दर्ज की गयी।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले चेतावनी दी थी कि अगर 48 घंटे के भीतर इस महत्वपूर्ण शिपिंग कॉरिडोर को नहीं खोला गया, तो ईरानी ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि, तब से उन्होंने अपनी समय सीमा को कई बार बढ़ाया है। हालिया स्थगन छह अप्रैल तक के लिए है। श्री ट्रंप ने दावा किया कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “बातचीत जारी है… और बहुत अच्छी चल रही है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि तेहरान के अनुरोध पर संभावित हमलों पर रोक को 10 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है।

हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इस दावे का खंडन किया है। वहां की सरकारी मीडिया ने बताया कि ईरान ने मध्यस्थों के जरिये जवाब में जलमार्ग की नाकेबंदी खत्म करने के लिए कई शर्तें रखी हैं। इनमें अमेरिका-इजरायल के हमलों को रोकना, 500 अरब डॉलर का हर्जाना और हॉर्मुज पर ईरान के नियंत्रण को मान्यता देना शामिल है।

श्री ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान ने सीमित संख्या में टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी है, लेकिन ईरान ने इसे खारिज करते हुए पुष्टि की कि फिलहाल उसने केवल भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे मित्र देशों को ही जलडमरूमध्य तक पहुंच दी है।

ब्रेंट क्रूड में भी आज एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट आयी, लेकिन यह अभी युद्ध-पूर्व स्तरों से लगभग 50 प्रतिशत ऊपर बना हुआ है। वहीं 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड लगभग 40 प्रतिशत ऊपर है।

टोक्यो, सियोल, हांगकांग और सिडनी सहित एशियाई बाजारों के शेयरों में गिरावट आयी, जो युद्ध की दिशा को लेकर बढ़ती अनिश्चितता को दर्शाता है। अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि इस देरी से बहुत कम राहत मिली है। एसपीआई एसेट मैनेजमेंट के स्टीफन इनेस ने कहा, “केवल समय खरीदा गया है, स्पष्टता नहीं मिली।”

इसी तरह, विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) ने व्यापार में भारी व्यवधान की चेतावनी दी है, जबकि आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने कहा कि अमेरिका में मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत से अधिक हो सकती है, जो पहले 2.8 फीसदी थी।

स्पेन ने 5.4 अरब यूरो (5.8 अरब डॉलर) के सहायता पैकेज को मंजूरी दी है, जबकि पोलैंड और दक्षिण कोरिया ने सब्सिडी और टैक्स राहत की शुरुआत की है। केंद्रीय बैंक भी सतर्क रुख अपना रहे हैं, वहीं अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया है कि ऊर्जा-जनित मुद्रास्फीति तेज होने के कारण ब्याज दरों में कटौती में देरी हो सकती है।

 

 

 

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