नयी दिल्ली, 23 मार्च (वार्ता) स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) में बड़ा विस्तार हुआ है इसके तहत देश में सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुयी है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार 28 फरवरी 2026 तक यह संख्या बढ़कर 36,229 हो गई है, जो योजना की शुरुआत के मुकाबले पांच गुना से अधिक है। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने ने लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।
श्री जाधव के अनुसार अनुसार इस योजना के तहत अब तक कुल 11.69 करोड़ लोग अस्पताल में भर्ती किए जा चुके हैं। इनमें से 6.74 करोड़ इलाज निजी अस्पतालों में हुआ है।
श्री जाधव ने बताया कि योजना के नियमों के अनुसार सूचीबद्ध अस्पताल किसी भी पात्र लाभार्थी को इलाज देने से मना नहीं कर सकते। यदि कोई अस्पताल इलाज से इनकार करता है या किसी तरह की गड़बड़ी होती है, तो लाभार्थी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए केंद्रीय शिकायत निवारण प्रबंधन प्रणाली (सीजीआरएमएस) और 24 घंटे चलने वाला टोल-फ्री नंबर 14555 उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि शिकायतों के समाधान के लिए तीन स्तर-जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर व्यवस्था बनाई गई है। हर स्तर पर नोडल अधिकारी और समितियां शिकायतों की जांच कर समाधान करती हैं।
श्री जाधव ने यह भी बताया कि अस्पतालों को इस योजना में शामिल करना एक निरंतर प्रक्रिया है। जो भी अस्पताल तय मानकों को पूरा करते हैं, उन्हें पैनल में जोड़ा जाता है। निजी अस्पतालों के लिए इसमें शामिल होना पूरी तरह स्वैच्छिक है।
श्री जाधव ने कहा कि इस योजना के जरिए सरकार का लक्ष्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है, जिससे देश में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच और मजबूत हो सके।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018-19 में योजना के तहत केवल 6,917 अस्पताल जुड़े थे, जिनमें 3,013 सरकारी और 3,904 निजी अस्पताल थे। अब यह संख्या बढ़कर 19,483 सरकारी और 16,746 निजी अस्पतालों सहित कुल 36,229 हो गई है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार योजना के तहत लाभार्थी देशभर में इन सभी सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज करवा सकते हैं। दावों के निपटान की प्रक्रिया भी तय समय सीमा में की जाती है-राज्य के अंदर 15 दिनों में और राज्य के बाहर 30 दिनों में हो जानी चाहिये।
