जावरा: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रतलाम ने एक अहम फैसले में चिकित्सा लापरवाही को गंभीर मानते हुए डॉक्टर और निजी अस्पताल पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि मरीज के इलाज में गंभीर त्रुटियां और बिना पर्याप्त जांच के ऑपरेशन करना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। बताते चले की, पिपलौदा तहसील के ग्राम पंचेवा निवासी यशोदाबाई (35) पेट दर्द के इलाज के लिए भीमाखेड़ी चौराहे के समीप स्थित एक होटल में संचालित हो रहे पाटीदार मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल पहुंची थीं।
यहां डॉ. पूजा देवड़ा और डॉ. यतीन्द्र सिंह ने मरीज को पेट में गांठ बताकर जल्द ऑपरेशन कराने की सलाह दी। मरीज को यह भी कहा गया कि यदि ऑपरेशन नहीं कराया तो गांठ फट सकती है और कैंसर का खतरा है। डॉक्टरों की सलाह पर 19 नवंबर 2022 को ऑपरेशन किया गया, लेकिन आरोप है कि बिना पर्याप्त जांच के ही ऑपरेशन कर मरीज की बच्चेदानी निकाल दी गई। ऑपरेशन के बाद भी महिला की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, बल्कि लगातार परेशानी बनी रही। पीडिता ने मामले की शिकायत प्रशासन और पुलिस से की। इस पर प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए पूर्व में 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया था।
लेकिन संतुष्टि नहीं होने पर पीडिता ने अपने अधिवक्ता मनीष त्रिवेदी के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया। आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद डॉ. पूजा देवड़ा और पाटीदार अस्पताल के संचालक को दोषी पाया। अधिवक्ता मनीष त्रिवेदी ने बताया, आयोग ने 10 लाख रुपए का हर्जाना अदा करने का आदेश दिया है। साथ ही परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह राशि 60 दिनों के भीतर जमा करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा मेडिकल काउंसिल द्वारा भी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पंजीयन को तीन माह के लिए निलंबित करने की अनुशंसा की गई है। यह फैसला चिकित्सा क्षेत्र में जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
