राजधानी में 20% आबादी पीने को मजबूर ई-कोलाई युक्त पानी, बड़े तालाब में मिल रहा 40 मिलियन लीटर सीवेज

भोपाल: राजधानी भोपाल की बड़ी आबादी आज भी प्रदूषित पानी पर निर्भर रहने को मजबूर है. शहर का प्रमुख जल स्रोत बड़ा तालाब, जिसे जीवनदायिनी माना जाता है, अब सीवेज और गंदगी के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है.हालांकि शहर में नर्मदा और कोलार डेम से भी जल आपूर्ति की जा रही है, इसके बावजूद लगभग 20 प्रतिशत आबादी अब भी बड़े तालाब के पानी पर निर्भर है. इनमें पीरगेट, शाहजहांनाबाद, ईदगाह हिल्स, कोहेफिजा, हमीदिया, बैरागढ़ और गांधीनगर सहित पुराने शहर के कई क्षेत्र शामिल हैं.नगर निगम की जांच में तालाब के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आई है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है. इसके बावजूद तालाब में मिल रहे सीवेज को रोकने के लिए अब तक ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए जा सके हैं.
जानकारी के अनुसार, शहर के करीब तीन दर्जन छोटे-बड़े नालों से प्रतिदिन लगभग 40 मिलियन लीटर सीवेज बड़े तालाब में पहुंच रहा है. कोहेफिजा, खानूगांव, संजय नगर, बोरवन गांव, बूढ़ाखेड़ा और बैरागढ़ क्षेत्र की बस्तियों का गंदा पानी सीधे तालाब में मिल रहा है, जिससे जल की गुणवत्ता लगातार गिर रही है.पूर्व में नगर निगम द्वारा करबला, खानूगांव और बैरागढ़ में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए गए थे, जिनका उद्देश्य गंदे पानी को फिल्टर कर तालाब को प्रदूषण से बचाना था. हालांकि, इन संयंत्रों का प्रभाव सीमित नजर आ रहा है और सीवेज का प्रवाह पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सका है.
वहीं, केंद्र सरकार की सहायता से शुरू की गई अमृत योजना के पहले चरण के बाद दूसरे चरण पर भी काम जारी है, जिसका उद्देश्य शहर के सीवेज प्रबंधन को सुधारना है. बावजूद इसके, बड़े तालाब में गिर रहे सीवेज को पूरी तरह ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने की व्यवस्था अभी तक प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पाई है.स्थिति यह है कि चार वर्ष बीतने के बाद भी तालाब को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए अपेक्षित ठोस कदम नहीं उठाए जा सके हैं, जिससे शहर के जल स्रोत पर संकट गहराता जा रहा है.
इनका कहना है
सीवेज के लिए तालाब में ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित हैं, अमृत 2 योजना के तहत उस पर कार्य किया जा रहा है. एैसा मेरी जानकारी में नहीं है कि कहां पर सीेवेज मिल रहा है मैं इसे दिखवाती हूं.
मालती राय, महापौर, नगर निगम भोपाल
मेरे समय में एसटीपी लगाये गये थे. इनकी मॉनिटरिंग होना चाहिए. अगर तालाब में सीवेज मिल रहा है तो उसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए.
आलोक शर्मा, सांसद एवं पूर्व महापौर भोपाल
बड़े तालाब के लिए अमृत 2 के पैकेज 3 के तहत कार्य शुरू किया गया है , जो एक से दो साल में पूर्ण हो जाएगा.
संस्कृति जैन, निगमायुक्त, नगर निगम भोपाल

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