
ग्वालियर। ग्वालियर के सैंडस्टोन को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए सांसद भारत सिंह कुशवाह ने संसद में आवाज उठाई है। बलुआ पत्थर के विकास और उसके वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कुशवाह ने वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री जितिन प्रसाद को अवगत कराया कि एक जिला एक उत्पाद बलुआ पत्थर टाइल्स उत्पाद एवं पारंपरिक नक्काशी पर निर्भर है लेकिन आधुनिक तकनीक की कमी के कारण इस उत्पाद की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ब्रांडिंग और मार्केटिंग नहीं हो पा रही है। स्थानीय कारीगरों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ने और ग्वालियर के प्रसिद्ध बलुआ पत्थर के शिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए और अधिक प्रयास किए जाने की जरूरत है।
कुशवाह ने मांग की कि सरकार इन कमियों को दूर करने के लिए आधुनिक मशीनरी, उन्नत तकनीक और वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए सरकार योजना बनाकर काम करे। एक जिला एक उत्पाद का उद्देश्य देश के प्रत्येक जिले के सर्वांगीण विकास के लिए एक विशिष्ट उत्पाद का चयन करना और उसकी ब्रांडिंग करना है।
यह पहल उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा चलाई जा रही है। इससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना और छोटे उद्योगों को तकनीकी व विपणन सहायता प्रदान करना है, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर सकें।
उन्होंने राज्य सरकार का हवाला देकर बताया कि ग्वालियर में स्थित एक विशेष औद्योगिक पार्क में पत्थर प्रसंस्करण के लिए सीएनसी न्यूमेरिकल मशीनों जैसी आधुनिक मशीनरी का उपयोग किया जाता है। ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) सेल स्थानीय इकाइयों के लिए निर्यात प्रोत्साहन, ब्रांडिंग और तकनीकी मार्गदर्शन की सुविधा प्रदान करता है। वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे, माल ढुलाई और प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए सब्सिडी प्रदान करती हैं। मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) द्वारा पत्थर प्रसंस्करण के लिए एक समर्पित औद्योगिक पार्क विकसित किया गया है, जहां कार्यरत इकाइयां आधुनिक पॉलिशिंग मशीन, वायर कैलिब्रेशन मशीन, सीएनसी न्यूमेरिकल मशीन और उन्नत तकनीक और अन्य आधुनिक उपकरणों जैसी आधुनिक मशीनरी का उपयोग करती हैं।
इसके अतिरिक्त, 10 से अधिक प्रतिष्ठान व्यापारिक निर्यातकों के माध्यम से निर्यात कर रहे हैं और मध्य प्रदेश ओडीओपी सेल द्वारा आयोजित विभिन्न सहायता और निर्यात प्रोत्साहन किया जा रहा है। यह मौजूद आधुनिक मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्नयन, कौशल विकास और निर्यात प्रोत्साहन के लिए सहयोग प्रदान करता है।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के लिए, व्यापार मेले, क्रेता-विक्रेता बैठकें, निर्यात जागरूकता कार्यक्रम और निर्यात संवर्धन परिषदों के साथ जुड़ाव जैसी निर्यात प्रोत्साहन पहलों को ओडीओपी सेल द्वारा सुगम बनाया जा रहा है। जीआई संवर्धन नीति का उद्देश्य कौशल विकास, बेहतर उत्पाद डिजाइन, गुणवत्ता, मानकीकरण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और जीआई संरक्षण के लिए समर्थन के माध्यम से जिला उत्पादों को सशक्त बनाना है, ताकि राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सके।
