विंध्य की डायरी
डा. रवि तिवारी
एलपीजी गैस सिलेंडर संकट को लेकर चारो तरफ हाहाकार मचा हुआ है. जहा एक तरफ गैस गोदामो पर जनता की भीड़ है तो उधर इस मुद्दे पर राजनीति भी जमकर हो रही है. विंध्य में कांग्रेस भले ही सडक़ो पर नही उतरी लेकिन गैस के बढ़े हुए दाम एवं संकट को लेकर अन्य जगह सरकार को घेरने में लगी है. यह बात और है कि कांग्रेसी नेता जनता के साथ धूप में सिलेंडर लेकर भले ही नही खड़े हो पर बयानबाजी से सरकार पर निशाना जरूर साध रहे है. देश के अलग-अलग कोनो में भले ही विरोध प्रदर्शन हो रहे है पर विंध्य के नेता केवल अपने बयानबाजी से ही सरकार को कटघरे में खड़ा करने के साथ जनता के आंसू पोछ रहे है.
चिलचिलाती धूप में हर कोई दो वक्त की रोटी के लिये सिलेंडर के साथ सडक़ पर खड़ा है. सत्ताधारी नेता चिप्पी साधे है और विपक्ष के नेता बयान तक सीमित है. सवाल यह उठता है कि जब जनता परेशान होती है चाहे सिलेंडर के लिये हो या बिजली के लिय, तब नेता कहा चले जाते है. इस समय विपक्ष में बैठी कांग्रेस नेताओं को जनता के साथ खड़े होने की जरूरत है और सरकार की नीतियों के चलते जो संकट पैदा हुआ है उसे बताना चाहिए. अगर मुद्दो की राजनीति करनी है तो यह एक अवसर भी है. रीवा में कांग्रेस प्रदेश महासचिव श्रीमती कविता पाण्डेय घर से बाहर निकल कर सिलेंडर के साथ महिलाओं के साथ खड़ी हुई और सरकार की नाकामी बताते हुए आंदोलन तक की चेतावनी दी है पर दूसरे कांग्रेसी बाहर तक नही निकले. अमूमन पूरे विंध्य में यही हाल है.
मनमानी बिजली बिल से विधायक चिंतित
तेज तपन के साथ पारा सातवें आसमान पर पहुंच रहा है तो वही भारी भरकम बिजली बिल ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है. मनमानी और खपत से कही ज्यादा आ रहे बिल को लेकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष चुरहट विधायक अजय सिंह भी चिंतित है. उन्होने सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर मंहगाई की मार है तो दूसरी तरफ इस तरह के करंट मारते बिलो ने ग्रामीण परिवारो की कमर तोड़ दी है. दरअसल उनके क्षेत्र में लगातार उपभोक्ताओं को अत्यधिक बिजली बिल थमाया जा रहा है जिसको लेकर उन्होने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सरकार और विभाग से खपत के आधार पर बिलों में सुधार किये जाने की बात कही है. साथ ही विभाग पर निशाना साधते हुए कहा कि गलत रीडिंग विभागीय उदासीनता के चलते निर्मित हुई है.
सांसद जी को टमस नदी की चिंता
नदियां किसी भी क्षेत्र की पहचान के साथ जीवन दायनी भी होती है और इनके संरक्षण-संवर्धन के लिये सरकार योजनाएं चला रही है, भले ही कागज तक सीमित हो. सतना-रीवा की भूमि को सिंचित करते हुए गंगा में मिलने वाली जीवन दायनी टमस नदी की चिंता सतना सांसद गणेश सिंह को है. भले ही वर्षो बाद उन्हे इसकी याद आई पर कहते है कि जब जागो तभी सबेरा, केन्द्रीय मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात कर टमस नदी के संरक्षण के लिये नमामि गंगे परियोजना के तहत विशेष कार्य योजना को मजूरी देने का आग्रह किया है. सतना मुख्यालय से सतना नदी बहती है जो आगे चलकर इसी क्षेत्र में टमस नदी से मिल जाती है और फिर रीवा की भूमि को सिंचित करने के बाद प्रयागराज पहुंचती है. दोनो नदियां प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है, संरक्षण की बेहद जरूरत है. दरअसल पेयजल सप्लाई भी इन्ही नदियों से होती है. लिहाजा इनका संरक्षण और पुर्नजीवन बेहद आवश्यक है. सतना सांसद को नदी की बेहद चिंता है और होनी भी चाहिए. शहर को पेयजल की सप्लाई इसी से सुनिश्चित होती है
