इंदौर: सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई पीएम राहत योजना को प्रभावी बनाने के लिए शहर में सरकारी और निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई. कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई बैठक में करीब 107 अस्पताल प्रतिनिधियों को योजना की प्रक्रिया, पात्रता और क्रियान्वयन की जानकारी दी गई. योजना के तहत दुर्घटना पीड़ितों को सात दिन तक डेढ़ लाख रुपए तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाएगा.
सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि कलेक्टर कार्यालय में शनिवार दोपहर पीएम राहत योजना के संचालन और प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उन्मुखीकरण बैठक आयोजित की गई थी. बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर शिवम वर्मा ने की, जबकि आयुष्मान योजना के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. योगेश तुकाराम भरसट विशेष रूप से मौजूद रहे. इस दौरान कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल में भर्ती कर उपचार उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है. इस योजना का उद्देश्य यही है कि दुर्घटना में घायल हर व्यक्ति को जीवन रक्षक उपचार मिल सके.
उन्होंने निजी और सरकारी अस्पतालों से योजना को गंभीरता से समझने और अधिक से अधिक अस्पतालों को इससे जोड़ने की अपील की.वहीं आयुष्मान योजना के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि जिले में 20 फरवरी से इस योजना का संचालन शुरू किया जा चुकी है. इसके तहत सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को दुर्घटना की तारीख से सात दिन के भीतर अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा. उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत अब तक 200 से अधिक दुर्घटना पीड़ितों को लाभ दिया जा चुका है, जिनमें से 24 मामलों में इंदौर के मरीज शामिल हैं.
हादसे के पीड़ित के इलाज में अस्पताल की कोताही की अनुमति नहीं डॉ. भरसट ने यह भी बताया कि दुर्घटना के बाद पहला एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है, जिसे ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है. इस दौरान यदि पीड़ित को उचित इलाज मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना अधिक रहती है. इसलिए किसी भी अस्पताल को दुर्घटना पीड़ित को उपचार देने से मना करने की अनुमति नहीं होगी. यह योजना विदेशी नागरिकों पर भी लागू होगी, यदि वे भारत में सड़क दुर्घटना का शिकार होते हैं. योजना के तहत दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर पीड़ित के अस्पताल पहुंचने पर ही उसे लाभ मिल सकेगा. पात्रता का सत्यापन पुलिस द्वारा ई-डीएआर प्रणाली और अस्पतालों के टीएमएस पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा. इस दौरान गैर-नामित अस्पतालों में भी दुर्घटना पीड़ित को प्राथमिक स्थिरीकरण उपचार देना अनिवार्य रहेगा.
दुर्घटना की स्थिति में टोल फ्री नंबर 112 पर सूचना दें
बैठक में बताया गया कि दुर्घटना की स्थिति में टोल फ्री नंबर 112 के माध्यम से एम्बुलेंस और पुलिस को सूचना दी जा सकती है. साथ ही दुर्घटना स्थल, स्थान और घायल व्यक्ति की आयु जैसी जानकारी भी दर्ज करना आवश्यक होगा. बैठक के अंत में डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि इस उन्मुखीकरण कार्यक्रम में निजी और शासकीय अस्पतालों के लगभग 107 प्रतिनिधियों ने भाग लिया.
आयुष्मान भारत योजना के साथ अन्य अस्पतालों को भी जोड़ा जा रहा उन्होंने उम्मीद जताई कि आयुष्मान भारत योजना से जुड़े सभी अस्पताल पीएम राहत योजना के तहत भी नामित होकर दुर्घटना पीड़ितों को उपचार उपलब्ध कराएंगे. इसके साथ ही अन्य अस्पतालों को भी योजना से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है. बैठक में डॉ. नरेंद्र भगड़िया, डॉ. अंकित परिहार, डॉ. नवीन दीवान सहित स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न अधिकारी और कार्यक्रम प्रभारी विशेष रुप से मौजूद रहे.
