वॉशिंगटन | पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार मचा दिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति ठप हो गई है, जिससे कीमतें $120 प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं। इस आपातकालीन स्थिति को देखते हुए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक विशेष लाइसेंस जारी कर रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री को 11 अप्रैल तक की सीमित छूट दे दी है। अमेरिका का तर्क है कि यह कदम वैश्विक सप्लाई चेन को पूरी तरह टूटने से बचाने और घरेलू ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अनिवार्य हो गया था।
अमेरिका के इस फैसले ने पश्चिमी सहयोगियों, विशेष रूप से G7 देशों के बीच कूटनीतिक विवाद पैदा कर दिया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा संकट की आड़ में रूस पर से प्रतिबंध हटाना यूक्रेन युद्ध पर उनके कड़े रुख को कमजोर कर सकता है। दूसरी ओर, रूस ने इसे अपनी कूटनीतिक जीत बताते हुए कहा कि रूसी तेल के बिना वैश्विक ऊर्जा बाजार कभी स्थिर नहीं रह सकता। रूसी अधिकारियों का दावा है कि अमेरिका अब कड़वी हकीकत स्वीकार कर रहा है और यह छूट पुतिन सरकार पर लगाए गए प्रतिबंधों की विफलता का प्रमाण है।
बढ़ते विरोध के बीच अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने स्पष्ट किया है कि यह ’30-दिवसीय ग्लोबल वेवर’ केवल उसी तेल पर लागू होगा जो 12 मार्च 2026 तक पहले से ही जहाजों पर लोड होकर निकल चुका था। सरकार का दावा है कि इस तेल पर रूस पहले ही टैक्स वसूल चुका है, इसलिए इसकी बिक्री से पुतिन प्रशासन को कोई नया वित्तीय लाभ नहीं होगा। यह अनुमति नए उत्पादन या भविष्य के सौदों के लिए नहीं है। अमेरिका ने इसे एक “अल्पकालिक और सीमित” व्यवस्था बताया है, जिसका एकमात्र उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी और रिकॉर्ड तोड़ महंगाई से बचाना है।

