नयी दिल्ली, 12 मार्च (वार्ता) केन्द्र सरकार ने गुरुवार को देश में रसोई गैस की कमी की आशंकाओं को दूर करने का प्रयास करते हुए कहा कि भारतीय रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं तथा घरेलू रसोई गैस उत्पादन में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और प्रतिदिन लगभग 50 लाख सिलेंडरों की आपूर्ति की जा रही है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, विदेश, पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि सरकार ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय रिफाइनरियां उच्च क्षमता उपयोग पर संचालित हो रही हैं और कई मामलों में उत्पादन 100 प्रतिशत से अधिक तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और रसोई गैस की आपूर्ति नियमित रूप से जारी है। उन्होंने बताया कि देशभर में प्रतिदिन 50 लाख सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं और घरेलू रसोई गैस उत्पादन में 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही देश के विभिन्न बंदरगाहों पर संचालन सामान्य बना हुआ है।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें और घबराहट में गैस सिलेंडरों की बुकिंग न करें।
गैर-घरेलू रसोई गैस के मामले में अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जो रेस्तरां, होटलों और अन्य वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को गैस आवंटन की समीक्षा कर रही है। यह समिति राज्य सरकारों और उद्योग संगठनों के साथ परामर्श कर उपलब्ध रसोई गैस के समुचित वितरण की योजना तैयार कर रही है। गैस पर दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधन विकल्प भी सक्रिय किए जा रहे हैं। औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए केरोसिन को सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खुदरा केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि ईंधन तेल भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकार ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को सलाह दी है कि इस संकट की अवधि में एक महीने तक आतिथ्य और रेस्तरां क्षेत्र को बायोमास, आरडीएफ पेलेट तथा केरोसिन या कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की अनुमति दी जाए, ताकि रसोई गैस की मांग पर दबाव कम किया जा सके और प्राथमिक उपभोक्ताओं के लिए इसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
