‘डांडिया क्वीन’ के नाम से मशहूर फाल्गुनी पाठक आज 57वां जन्मदिन मना रही हैं। 90 के दशक में उनके गाने याद पिया की आने लगी और मैंने पायल है छनकाई ने युवाओं के दिलों पर राज किया।
भारतीय पॉप म्यूजिक की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली मशहूर सिंगर फाल्गुनी पाठक 12 मार्च को अपना 57वां जन्मदिन मना रही हैं। 90 के दशक में उनके गाने युवाओं के दिलों की धड़कन बन गए थे। अपनी सुरीली आवाज़ और सादगी भरे अंदाज से फाल्गुनी ने संगीत प्रेमियों के बीच खास जगह बनाई। आज भी लोग उन्हें प्यार से ‘डांडिया क्वीन’ के नाम से जानते हैं।
फाल्गुनी पाठक का जन्म 12 मार्च 1964 को मुंबई के एक गुजराती परिवार में हुआ था। 90 के दशक में उन्होंने एक से बढ़कर एक रोमांटिक गाने गाए, जो उस दौर के युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुए। साल 1998 में उनका पहला हिट एल्बम सामने आया, जिसमें मशहूर गाना याद पिया की आने लगी शामिल था। इस गाने ने रिलीज होते ही धूम मचा दी और देखते ही देखते यह हर युवा की प्लेलिस्ट का हिस्सा बन गया।
बचपन से था संगीत का जुनून
फाल्गुनी को बचपन से ही गाने का शौक था। उन्होंने महज 9 साल की उम्र में अपना पहला स्टेज शो किया था। इसके बाद 10 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया। उनकी आवाज में ऐसा जादू था कि धीरे-धीरे वह पॉप म्यूजिक की दुनिया में एक बड़ा नाम बन गईं। साल 1998 से 2000 के बीच उनके एल्बम गानों ने संगीत जगत में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की और फाल्गुनी युवाओं की पसंदीदा सिंगर बन गईं।
पैंट-शर्ट वाला स्टाइल कैसे बना पहचान
फाल्गुनी पाठक सिर्फ अपने गानों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनोखे ड्रेसिंग स्टाइल के लिए भी जानी जाती हैं। वह अक्सर पैंट, शर्ट और हाफ जैकेट में नजर आती हैं। एक इंटरव्यू में फाल्गुनी ने बताया था कि उनके इस स्टाइल के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। उन्होंने बताया कि वे पांच बहनों में सबसे छोटी हैं और परिवार को पांचवां बेटा चाहिए था। ऐसे में उनकी बहनें बचपन में उन्हें लड़कों की तरह तैयार करती थीं। धीरे-धीरे यही स्टाइल उनकी पहचान बन गया।
आज भी डांडिया नाइट्स की जान
फाल्गुनी पाठक को आज ‘डांडिया क्वीन’ कहा जाता है। नवरात्रि के दौरान उनके लाइव डांडिया शो देशभर में बेहद लोकप्रिय होते हैं। उनके गानों पर लोग झूमते और गरबा-डांडिया का आनंद लेते हैं। आज भी उनकी आवाज और परफॉर्मेंस लोगों के दिलों में वही उत्साह और ऊर्जा भर देती है, जो 90 के दशक में हुआ करती थी।
