तेहरान | ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी महायुद्ध आज 12वें दिन में प्रवेश कर गया है। इजराइल और अमेरिकी सेना तेहरान सहित ईरान के विभिन्न ठिकानों पर लगातार हवाई हमले कर रही है, जिसमें अब तक 1300 से अधिक लोगों के मारे जाने की आशंका है। अकेले तेहरान में 460 नागरिक जान गंवा चुके हैं, जबकि लेबनान में हिज्बुल्लाह और इजराइल के बीच जारी गोलाबारी के कारण करीब 7.6 लाख लोग बेघर हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इसे मानवीय संकट करार दिया है। इस बीच, इस्फहान में यूनेस्को की हेरिटेज साइट और एक एलिमेंट्री स्कूल पर हुए धमाके की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश पैदा कर दिया है, जिसमें बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों के हताहत होने की खबर है।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि समुद्र में व्यापारिक जहाजों को रोकने के लिए माइंस (Mines) बिछाई गईं, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। ताजा कार्रवाई में अमेरिकी सेना ने उन ईरानी जहाजों को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया है जो कथित तौर पर माइंस बिछाने के काम में लगे थे। वहीं, ईरान की आईआरजीसी (IRGC) ने धमकी दी है कि यदि उन पर हमले नहीं रुके, तो वे फारस की खाड़ी से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे। इस सैन्य गतिरोध ने दुनिया भर के ऊर्जा गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
इस भीषण युद्ध का सीधा असर वैश्विक बाजारों और तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल तक पहुँचने के बाद अब $90 के आसपास अस्थिर बनी हुई हैं। तेल की अनिश्चित आपूर्ति के कारण मिस्र और थाईलैंड जैसे देशों ने ‘इमरजेंसी फ्यूल’ बचाने के सख्त उपाय लागू कर दिए हैं। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह लड़ाई ‘जल्द’ समाप्त हो सकती है, लेकिन ईरान फिलहाल किसी भी युद्धविराम (Ceasefire) की बातचीत से इनकार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो विश्व भर में ऊर्जा संकट और महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है।

