नगर निगम, विधानसभा और लोकसभा चुनाव के कारण रोकी एमओएस पर संपत्तिकर वसूली

इंदौर:नगर निगम ने एमओएस पर टैक्स वसूली एक साथ नहीं, बल्कि सोची समझी रणनीति के तहत की है. शिवराज सरकार ने 2020 में गजट नोटिफिकेशन कर दिया था, लेकिन लागू 5 साल बाद करने के पीछे कारण है. वह कारण है चुनाव, जिससे भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता था.नगर निगम ने इस साल वसूली का नया रिकॉर्ड बनाने के लिए संपत्ति कर बिल में एमओएस (मार्जिनल ओपन स्पेस) राशि जोड़ कर बिल जारी किए हैं.

राशि भी एक साल के नहीं, बल्कि राज्य सरकार द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन 2020 के साल से पिछले पांच सालों की एक साथ जोड़ दी गई है. इसको लेकर शहर के 5.25 लाख संपत्ति कर धारकों की नींद उड़ गई है. नगर निगम के इस साल लागू करने के पीछे बड़ा साफ कारण है और वह यह है कि अगले दो साल अभी कोई चुनाव नहीं है. भाजपा सरकार ने 2020 में जब एमओएस पर संपत्ति कर वसूलने का निर्णय कर लिया था, तो लागू पांच साल बाद करने के पीछे क्या कारण था? यह जानना जरूरी है.

चुनाव में उठाना पड़ता नुकसान
सन् 2020 से एमओएस मिलाकर संपत्ति कर नहीं वसूलने का सबसे बड़ा कारण यह था कि पहले नगर निगम चुनाव, फिर विधानसभा चुनाव और अंत में लोकसभा चुनाव थे. यदि नगर निगम हाथोंहाथ लागू कर देता तो भाजपा को चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ता और कांग्रेस उक्त मुद्दे को भुना लेती. यही वजह थी कि जनता पर एमओएस मिलाकर संपत्ति कर वसूली को पांच साल रोका गया.

प्लॉट साइज अनुसार जारी किए बिल
शहर में हर संपत्ति धारक को उसके प्लॉट और जमीन की साइज के अनुसार बिल जारी किए गए हैं. इससे जिसका पिछले साल संपत्ति 7500 से 8 हजार के बीच था, उसका अब सीधे 28 से 30 हजार के बीच बिल जारी किए गए हैं. उक्त बिल में पांच साल की एमओएस राशि जोड़ दी गई है. इस तरह इस साल नगर निगम 1500 सौ करोड़ रुपए राजस्व वसूली लक्ष्य को हासिल करेगी

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