नई दिल्ली | मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने से भारत में कमर्शियल एलपीजी की भारी किल्लत हो गई है। होटल और रेस्टोरेंट उद्योग ने चेतावनी दी है कि यदि सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई, तो देश के हजारों ढाबे और रेस्टोरेंट बंद हो जाएंगे। इस संकट से निपटने के लिए मोदी सरकार ने तेल विपणन कंपनियों के तीन कार्यकारी निदेशकों की एक ‘विशेष समीक्षा समिति’ (टास्क फोर्स) गठित की है। यह टास्क फोर्स होटल, अस्पतालों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को गैस की सुचारु आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर घंटे की रिपोर्ट तैयार करेगी और वितरण बाधाओं को दूर करेगी।
सरकार ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता को प्राथमिकता देते हुए कई कड़े कदम उठाए हैं। एलपीजी की संभावित जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए घरेलू सिलेंडर की बुकिंग अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। तेल मंत्रालय ने देश की सभी रिफाइनरियों को निर्देश दिए हैं कि वे फिलहाल पेट्रोकेमिकल उत्पादन को घटाकर एलपीजी उत्पादन को अधिकतम स्तर पर ले जाएं। भारत अपनी कुल एलपीजी मांग का लगभग 62% आयात करता है, जिसमें से अधिकांश हिस्सा सऊदी अरब से आता है, जो मौजूदा युद्ध की स्थिति के कारण बाधित हुआ है।
मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में सप्लाई व्यवधान का असर दिखने लगा है, जहाँ होटलों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इंडिया होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अनुसार, सप्लाई रुकने से छोटे व्यवसायों पर ताला लगने की नौबत आ गई है। फिलहाल दिल्ली में 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹1883 है, लेकिन किल्लत के चलते इनकी कालाबाजारी की आशंका बढ़ गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर आयातित गैस उपलब्ध कराई जाएगी ताकि सार्वजनिक सेवाएं प्रभावित न हों।

