नयी दिल्ली, 07 मार्च (वार्ता) निजी क्षेत्र के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए लागू पेंशन योजना ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम पेंशन 7500 रुपये के साथ महंगाई भत्ता देने और चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने की मांग को लेकर पेंशनर नौ मार्च से यहां तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन करेंगे। पेंशनरों की राष्ट्रीय संघर्ष समिति (एनएसी) के अध्यक्ष कमांडर अशोक राऊत ने सरकार पर आरोप लगाया कि औसतन 1,171 रुपये पेंशन पाकर पेंशनर आर्थिक बदहाली में जीवन-यापन रहे हैं और सरकार पेंशनरों की दुर्दशा के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि पांच मार्च को केन्द्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने वार्ता में कहा, “आपका काम शीघ्र होगा, इसलिए आन्दोलन न किया जाये, लेकिन हमने स्पष्ट कह दिया कि पहले पेंशन बढ़ोत्तरी की घोषणा हो, अन्यथा नौ मार्च से आन्दोलन जरूर होगा। ”
श्री राऊत ने कहा कि देश भर के 81 लाख पेंशनरों की चार सूत्री मांगों के लिए पिछले 10 वर्षों से सड़क से लेकर संसद तक हर प्रकार का आन्दोलन और मांग की जा रही है। सात साल से बुलढाणा में क्रमिक अनशन जारी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर सभी मंत्रियों से मिलकर गुहार लगायी जा चुकी है। विभिन्न मंत्रालयों में समिति के साथ कई बार उच्च स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन सरकार के बार-बार आश्वासन दिये जाने के बावजूद अभी तक कोई घोषणा न किए जाने से पेंशनरों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसको देखते हुए संगठन ने निर्णय लिया है कि नौ से 11 मार्च तक दिल्ली में जंतर-मंतर पर देशभर के पेंशनर प्रदर्शन करेंगे।
उन्होंने कहा कि उनकी मांगों में न्यूनतम पेंशन 7,500 रुपये प्रति माह के साथ ही इस पर महंगाई भत्ता दिया जाये, पेंशनर दंपति को मुफ्त चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाये। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार उच्च पेंशन लागू की जाये। इसी के साथ ही ईपीएस95 योजना से वंचित पेंशनरों को 5000 रुपये प्रति माह पेंशन दी जाये।

