ग्वालियर: अपने हुनर व सरकार से मिली मदद की बदौलत वैशाली आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। वैशाली के वर्षों पुराने सपने को साकार करने की राह मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने दिखाई है।ग्वालियर शहर के माधौगंज क्षेत्र की निवासी वैशाली परिहार लहंगा-चुनरी और पारंपरिक ज्वेलरी को किराए पर देने का व्यवसाय शुरू करना चाहती थीं। इसके लिये उनके पास हुनर तो था पर आर्थिक तंगी आड़े आ रही थी। सीमित आय परिवार के दैनिक खर्च, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर ही खर्च हो जाती थी।
पर वैशाली ने ठान रखा था कि हम अपने सपने को पूरा करके ही रहेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत मिल रही मासिक आर्थिक सहायता को बचत खाते में डालना शुरू किया।
इस बचत से वैशाली ने विवाह व सामाजिक आयोजनों के दौरान लहंगा-चुनरी और पारंपरिक ज्वैलरी को किराए पर देने का काम छोटे स्तर पर शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उनका कारोबार बढ़ता गया और अब वे अपने परिवार को आर्थिक संबल देने में सक्षम हो गई हैं। वैशाली अक्सर कहा करती थीं कि उनके हुनर को अब पंख मिल गए हैं।
वैशाली बताती हैं कि बच्चों की पढ़ाई और परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति से मिलने वाली खुशी को हम शब्दों में बयां नहीं कर सकते। उनका कहना है कि लाड़ली बहना योजना ने आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें आत्म सम्मान भी दिया है। लाड़ली बहना योजना की मासिक धनराशि 1500 रुपए करने के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए वैशाली बोलीं कि इससे हम जैसी अन्य महिलायें भी आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ेंगीं।
