नयी दिल्ली, 06 मार्च (वार्ता) केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत भविष्य में अपने शिक्षा संस्थानों में सुविधाएं बढ़ा कर तथा शिक्षण-प्रशिक्षण की आधुनिक प्रौद्योगिकी अपना कर अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिये आकर्षित कर सकता है। श्री गोयल ने कहा कि नयी शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत विदेशी शिक्षण संस्थानों को भारत में परिसर स्थापित करने की छूट मिली है और दूसरे देशों के साथ विद्यार्थियों के आने जाने का सिलसिला बढ़ रहा है। वाणिज्य मंत्री यहां “विकसित भारत 2047 के लिए उच्च शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण की नयी कल्पना” विषय पर कुलपतियों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन वाणिज्य मंत्रालय के संस्थान भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) ने किया था। श्री गोयल ने कहा कि 2047 तक भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र में बदलने के सपने को पूरा करने के लिये शिक्षा जगत, सरकार और उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाना होगा। श्री गोयल ने कहा कि मोदी सरकार की शिक्षा नीति से शिक्षा सुविधाओं को अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने की उम्मीद करने, देश की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए शिक्षा संस्थानों के विस्तार एवं दुनिया भर से विद्यार्थियों को आकर्षित करने की सोच जागृत हुई है।
उन्होंने विकसित देशों के विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए भारत आने का आह्वान करते हुए तीन साल के पाठ्यक्रम जैसे मॉडल का सुझाव दिया, जिसमें विद्यार्थी एक साल भारत में और दो साल अपने मूल संस्थान में बिता सकते हैं, या दोनों संस्थानों के बीच अपना समय बराबर बांट सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इससे एक दूसरे के देश के प्रति युवाओं की समझ बढ़ेगी और विदेशी छात्र-छात्राओं को जानकारी होगी कि विकासशील देश कैसे सोचते हैं, कैसे काम करते हैं और संस्कृतियां तथा समाज से किस प्रकार जुड़ते हैं। श्री गोयल ने कहा , ‘ जैसे-जैसे भारतीय संस्थान आधुनिक शिक्षा तकनीक अपनाएंगे, सुविधा सुधारेंगे और वैश्विक रुझानों के बारे में शिक्षकों की समझ में सुधार करेंगे, भारतीय विद्यार्थी विदेश के बजाय भारत में पढ़ना ज़्यादा पसंद करेंगे। इसके साथ ही, भारत दुनिया भर के छात्रों को आकर्षित करना शुरू कर देगा।’ श्री गोयल ने कहा कि इस समय भारत आने वाले हर एक अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी पर भारत के 28 विद्यार्थी विदेश जाते हैं। इसके बाद विदेश जाने वाले का मौजूदा अनुपात उलट जाएगा, और भारत लगभग 13 लाख विदेशी छात्र-छात्राओं को आकर्षित करेगा और बहुत कम भारतीय युवा पढ़ाई के लिए विदेश जाएंगे। वाणिज्य मंत्री ने कहा कि नयी शिक्षा नीति 2020 से अंतर्राष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों को भारत में आकर कैम्पस खोलने की इजाज़त दी गयी है और विश्वविद्यालयों को ‘डुअल डिग्री’ (दोहरा प्रमाण-पत्र)’ देने के लिए भारतीय संस्थानों के साथ गठबंधन करने में मदद की है। इसने दूसरे देशों के साथ विद्यार्थियों के आवागमन को भी बढ़ावा दिया है। इससे छात्र छात्राओं को एक दूसरी की शिक्षा प्रणालियों को जानने, अनुभव करने का अवसर मिलेगा। इस सम्मेलन का आयोजन उच्च शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण के मुख्य पहलुओं पर विषयवार चर्चाओं और विशेषज्ञों के साथ संवाद के लिए किया गया। इसमें अंतररार्ष्टीय भागीदारी , विद्यार्थियों के आवागमन, विनियामकीय व्यवस्थाएंऔर डुअल डिग्री प्रोग्राम जैसे शामिल हैं। इसमें भारतीय संस्थानों की वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई है।

