
सारनी। वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) के पाथाखेड़ा क्षेत्र में ठेका मजदूरों के वेतन से कथित अवैध वसूली का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। आंदोलन के आठवें दिन शुक्रवार को बड़ी संख्या में ठेका मजदूर न्याय की गुहार लेकर थाना सारनी पहुंचे और ठेकेदारों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। अब तक कुल 168 मजदूरों द्वारा शिकायत पत्र सौंपे जाने से पूरे क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर तीखी चर्चा शुरू हो गई है।
सूत्रों से जानकारी मिली है कि आनन फानन में प्रबंधन अधिकारियों ने ठेकेदारों की बैठक होने की जानकारी मिली है बैठक में मजदूरों की मांग को लेकर विश्लेषण होने की संभावना है।
मजदूरों ने आरोप लगाया कि ठेकेदारों द्वारा वेतन भुगतान में भारी अनियमितता बरती जा रही है। उनका कहना है कि 32,500 रुपये मासिक वेतन में से लगभग 19,000 रुपये प्रति माह जबरन वापस लेने का दबाव बनाया जाता है। मजदूरों का आरोप है कि यदि वे पैसे वापस नहीं करते तो उन्हें काम से निकालने और ब्लैकलिस्ट करने की धमकी दी जाती है।
इस पूरे घटनाक्रम से श्रमिक बस्तियों, गली-मोहल्लों और चौक-चौराहों पर आक्रोश का माहौल बन गया है। मजदूरों का कहना है कि वर्षों से मेहनत करने के बावजूद उन्हें शोषण और भय के साये में काम करना पड़ रहा है।
मामले को लेकर श्रमिक समाजसेवी प्रदीप नागले, संतोष देशमुख और मनोज पवार ने इसे मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया। उनका कहना है कि मजदूरों की मेहनत की कमाई को जबरन वापस लेना न केवल अमानवीय है बल्कि कानूनन भी गंभीर अपराध है। उन्होंने बताया कि पूरे प्रकरण की जानकारी डब्ल्यूसीएल के सीएमडी, नागपुर मुख्यालय को भी भेज दी गई है और दोषी ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
वहीं थाना प्रभारी जयपाल इवनाती ने मजदूरों की शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए पूरे मामले की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जानकारी में महिला मजदूरों से भी वेतन में कटौती का आरोप सामने आया है, जहां 14 हजार रुपये वेतन में से लगभग 10 हजार रुपये वापस लेने का दबाव बनाए जाने की बात कही गई है।
थाना प्रभारी ने स्पष्ट कहा कि यदि मजदूरों से वेतन वापस लेने का दबाव बनाया गया है तो यह कानूनन अपराध है। मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटनाक्रम ने पाथाखेड़ा क्षेत्र में हलचल मचा दी है और अब सभी की निगाहें पुलिस जांच तथा प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। मजदूरों का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
