
बरघाट। वन विभाग के बहरई वन परिक्षेत्र अंतर्गत पांडरवानी बीट में एक महिला की वन्य प्राणी के हमले में दर्दनाक मौत हो जाने से पूरे क्षेत्र में शोक और दहशत का माहौल व्याप्त है। प्रारंभिक तौर पर बाघ के हमले की आशंका जताई जा रही है, हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पांडरवानी, तहसील बरघाट निवासी अनीता बाई (पति रूपकुमार चौधरी) प्रतिदिन की तरह गांव से लगे जंगल क्षेत्र में महुआ बिनने के लिए गई थीं। महुआ संग्रहण इस क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है और बड़ी संख्या में महिलाएं एवं किसान सुबह के समय जंगल की ओर जाते हैं। बताया जा रहा है कि घटना स्थल ग्राम से लगभग 800 मीटर की दूरी पर स्थित है। जब काफी देर तक अनीता बाई घर नहीं लौटीं तो परिजनों और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान जंगल में उनका क्षत-विक्षत शव मिलने से पूरे गांव में सनसनी फैल गई।
सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मौके से मिले साक्ष्यों के आधार पर बाघ के हमले की आशंका जताई है। बहरई वन परिक्षेत्र के परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी रवि गेडाम ने बताया कि मौके का पंचनामा तैयार कर लिया गया है तथा शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तकनीकी जांच के आधार पर ही यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि हमला किस वन्य प्राणी द्वारा किया गया।
वन अधिकारियों के अनुसार यदि यह बाघ का हमला सिद्ध होता है तो शासन की ओर से निर्धारित आर्थिक सहायता राशि पीड़ित परिवार को नियमानुसार प्रदान की जाएगी। वर्तमान में वन विभाग की टीम क्षेत्र में सतत निगरानी बनाए हुए है और संभावित वन्य प्राणी की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि आसपास के गांवों में गश्त बढ़ा दी गई है तथा ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि एवं कांग्रेस नेता राहुल उइके भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदना व्यक्त की और प्रशासन से मांग की कि पीड़ित परिवार को शीघ्र एवं उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं अत्यंत दुखद और पीड़ादायक हैं तथा प्रशासन को मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस रणनीति बनानी चाहिए।
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कुछ समय से क्षेत्र में वन्य प्राणियों की गतिविधि में वृद्धि देखी जा रही है। खेतों में काम करने और जंगल जाने वाले लोगों में भय का वातावरण बना हुआ है। कई ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में और भी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि वन विभाग द्वारा नियमित गश्त, चेतावनी बोर्ड की स्थापना, रात्रिकालीन निगरानी तथा आवश्यकतानुसार विशेष टीम की तैनाती की जाए।
यह घटना ग्राम पांडरवानी ही नहीं बल्कि पूरे बरघाट क्षेत्र के लिए अत्यंत हृदयविदारक है। अनीता बाई एक मेहनतकश महिला थीं और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सहयोग करती थीं। उनके असामयिक निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में शोक का माहौल है और अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं उन क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलती हैं जहां वन क्षेत्र गांवों के नजदीक है और आजीविका के लिए ग्रामीणों को जंगल पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में सामुदायिक जागरूकता, समयबद्ध सूचना प्रणाली और त्वरित मुआवजा वितरण जैसी व्यवस्थाएं अत्यंत आवश्यक हैं।
वन विभाग ने आश्वासन दिया है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक सभी कदम उठाए जाएंगे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त होते ही स्पष्ट जानकारी साझा की जाएगी तथा नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अकेले जंगल न जाएं और किसी भी संदिग्ध वन्य प्राणी की गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को दें।
फिलहाल, पूरे क्षेत्र में भय और शोक का वातावरण है तथा सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
