टैरिफ को असंवैधानिक बताने पर भड़के ट्रंप, सुप्रीम कोर्ट को सुनाई खरी-खोटी, बोले- फिर से सोचने की जरूरत

डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निराशा जताई, जिसमें उनके लगाए गए वैश्विक टैरिफ को असंवैधानिक ठहराया गया और उन्होंने पुनर्विचार की अपील की।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर गहरी निराशा व्यक्त की है, जिसमें उनके द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को असंवैधानिक घोषित किया गया। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय उन देशों और कंपनियों को सैकड़ों अरबों डॉलर वापस करने की अनुमति दे सकता है, जिन्होंने वर्षों से अमेरिका से लाभ उठाया।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील भी की। ट्रंप ने लिखा कि अब इस निर्णय के अनुसार, जो कंपनियां और देश अमेरिका को लूटते रहे हैं, वे यह गतिविधि बढ़ा कर जारी रख सकते हैं। ट्रंप ने अपनी पोस्ट ट्रुथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की, जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को “अत्यधिक निराशाजनक” बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को बताया था असंवैधानिक
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को 6-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाया था, जिसमें ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक शुल्कों को इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के दुरुपयोग के आधार पर असंवैधानिक ठहराया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को बिना कांग्रेस की मंजूरी के इतने व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।

इस फैसले का मतलब है कि ट्रंप के आदेश पर लागू “लिबरेशन डे” शुल्क और अन्य शुल्क अब वैध नहीं हैं। अदालत के अनुसार, व्यापार नीति में शुल्क लगाने का मुख्य अधिकार कांग्रेस का है, न कि राष्ट्रपति का। इससे वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ सकती है और कई कंपनियां पहले चुकाए गए शुल्क की वापसी के लिए मुकदमे दायर कर रही हैं।

मामले पर दोबारा सुनवाई की उम्मीद कम
विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ पुनः सुनवाई बेहद दुर्लभ है। फिर भी ट्रंप ने मामले की दोबारा सुनवाई की संभावना पर सवाल उठाया है। उन्होंने चिंता जताई कि यह निर्णय विदेशी देशों और कंपनियों को “अनुचित विन्डफॉल” दे सकता है।

फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने नया शुल्क लगाने की कोशिश की, लेकिन यह भी कांग्रेस की मंजूरी पर निर्भर होगा। कोर्ट के निर्णय से यह स्पष्ट हुआ कि राष्ट्रपति के पास व्यापारिक शुल्क लगाने की इतनी व्यापक शक्ति नहीं है। इस फैसले ने अमेरिका की व्यापार नीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था में नई चुनौतियां पैदा की हैं।

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