मुंबई | रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी को कानूनी मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को उस अंतरिम रोक (स्टे) को हटा दिया है, जिसने बैंकों को उनके खिलाफ ‘धोखाधड़ी’ की कार्रवाई करने से रोक रखा था। अदालत ने दिसंबर 2025 के एकल पीठ के आदेश को ‘कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण’ करार देते हुए बैंकों को अपनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही, अदालत ने अंबानी के वकीलों की उस मांग को भी खारिज कर दिया जिसमें फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने के लिए चार हफ्ते का समय मांगा गया था।
यह पूरा विवाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और अन्य बैंकों द्वारा जारी उन ‘कारण बताओ’ नोटिसों से जुड़ा है, जो ऑडिट रिपोर्ट में मिली वित्तीय खामियों के आधार पर दिए गए थे। बैंकों का आरोप है कि अंबानी की कंपनियों के खातों में संदिग्ध लेनदेन और वित्तीय गड़बड़ियां पाई गई हैं। इसके आधार पर बैंक इन खातों को आधिकारिक तौर पर ‘फ्रॉड’ की श्रेणी में डालना चाहते थे। हालांकि, अंबानी की दलील थी कि उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है, लेकिन खंडपीठ ने वर्तमान स्थिति में राहत जारी रखने से इनकार कर दिया।
बॉम्बे हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब बैंकों और ऑडिट फर्मों के लिए अनिल अंबानी की कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का रास्ता साफ हो गया है। यदि बैंक इन खातों को आधिकारिक रूप से धोखाधड़ी घोषित कर देते हैं, तो समूह के लिए भविष्य में नई बैंकिंग सुविधाएं प्राप्त करना लगभग असंभव हो जाएगा। यह फैसला न केवल अनिल अंबानी के लिए व्यक्तिगत चुनौती है, बल्कि यह आरबीआई के 2024 के मास्टर सर्कुलर और बैंकिंग नियमों की व्याख्या के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

