रायसेन: रायसेन जिले में एक नाबालिग की ओर से शिकायत करने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए नाबालिग समेत तीन परिवारों को बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया।सूत्रों के अनुसार भोपाल रोड स्थित नीमखेड़ा के ग्राम केवटी में संचालित अवैध ईंट भट्टे पर काम करने वाले नाबालिग ने कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा से लिखित शिकायत की थी। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों की टीम ने कल अवैध ईंट भट्टे पर पहुंचकर छापेमार कार्रवाई की। इस दौरान यहां 12 परिवारों में करीब 40 से 50 परिवार काम करते मिले जो सभी कर्ज में दबे थे। प्रशासन की टीम ने सभी मजदूरों से देर शाम तक पूछताछ कर उनके दस्तावेजों की जांच की। कार्रवाई देर रात तक जारी रही, जिसके बाद शिकायतकर्ता नाबालिग सहित तीन परिवारों को बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया।
शिकायतकर्ता नाबालिग ने बताया कि ईंट भट्टा संचालक विजय कुमार गुप्ता द्वारा उसे 8वीं कक्षा के पेपर में शामिल होने नहीं दिया गया। जब उसने पेपर के लिए स्कूल जाने का बोला तो उसके साथ अभद्रता की गई। नाबालिग ने बताया कि उसके बड़े भाई की शादी के लिए 70 हजार रुपए का कर्ज लिया था। परिवार चुका नहीं पाया, तो कर्ज बढ़कर एक लाख हो गया। जब दूसरी जगह काम करने जाने लगे तो भट्ठा संचालक ने नहीं जाने दिया और जबरदस्ती उसके भट्टे पर ही काम करने का बोला गया।इसके बाद उसने कलेक्टर पहुंचकर कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा को एक लिखित शिकायत की थी।
इसके अलावा कार्रवाई के दौरान भी भट्ठा संचालक मजदूरों को डराता धमकता रहा, उसे कई बार टीम ने रोका भी पर वह नहीं माना बाद में उसे पुलिस गाड़ी में बिठाकर ले गई । भट्टे पर बनी झोपड़ी में ईंट बनाने वाले परिवार निवास करते हैं। झोपड़ी में ठीक से खड़े तक नहीं हो सकते, जबकि परिवार के पांच सदस्य इसी झोपड़ी में गुजर बसर करते हैं।यहां बच्चों की स्थिति सबसे ज्यादा दयनीय मिली। कई लोग बीमार भी पाए गए, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग की टीम के द्वारा दवाई दी गई।अनुविभागीय अधिकारी मनीष शर्मा ने बताया कि प्रशासन को मौके पर 12 परिवार मिले। महिला और बच्चों सहित 35 से 40 लोग वहीं रह रहे थे।
लगभग हर परिवार पर 10 हजार से डेढ़ लाख तक का कर्ज है। मजदूरों ने बताया कि साप्ताहिक भुगतान होता है। पति-पत्नी को मिलाकर 1500 रुपए और बच्चों के काम करने पर 2500 रु. तक। औसतन 100 से 150 रु. प्रतिदिन की मजदूरी पड़ती है। ठेका प्रति हजार ईंट 700 रु. का है। साल के अंत में हिसाब होता है। यदि मजदूरी अधिक बनी तो कर्ज में समायोजित होती है। कम हुई तो बाकी राशि फिर कर्ज में जुड़ जाती है। अधिकांश परिवारों का कर्ज घटने के बजाय बढ़ता जाता है। कर्ज चुकाए बिना दूसरी जगह काम करने की अनुमति नहीं होती।
