
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति को हरी झंडी दी है। अब कैबिनेट के निर्णय के बाद प्रदेश में शराब की कीमतों में औसतन करीब 20 प्रतिशत तक इजाफा होना तय माना जा रहा है। इसके साथ ही शराब दुकानों के हर साल होने वाले नवीनीकरण की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब दुकानों का आवंटन पारदर्शी ई-टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।
सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि राजस्व वसूली में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। आगामी वित्तीय वर्ष में आबकारी मद से 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है।
सुरक्षा राशि और बैंक गारंटी नियमों में बदलाव
नई नीति में आवंटन प्रक्रिया को सरल बनाते हुए एफडी और पारंपरिक बैंक गारंटी की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। अब निर्धारित शुल्क ई-चलान और ई-बैंकिंग के जरिए जमा किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अवैध शराब के निर्माण और तस्करी पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी तथा सीमावर्ती इलाकों में निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा।
शराब निर्माण कंपनियों को उत्पाद मूल्य निर्धारण में सीमित लचीलापन भी दिया गया है, ताकि वे प्रतिस्पर्धी बाजार में बेहतर तरीके से कार्य कर सकें।
जनजातीय और अनुसूचित जाति योजनाओं को भी मंजूरी
कैबिनेट ने जनजातीय एवं अनुसूचित जाति वर्ग की योजनाओं को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की स्वीकृति दी है। विभागीय योजनाओं, क्षेत्रीय विकास कार्यक्रमों और प्रशासनिक संचालन के लिए 53 करोड़ 97 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
इसके अतिरिक्त अनुसूचित जाति और जनजाति बस्तियों के विकास, 1032 कार्यालय भवनों के निर्माण व विद्युतीकरण, जननायक टंट्या भील मंदिरों के जीर्णोद्धार तथा ग्रामीण स्कूलों के उन्नयन के लिए 583 करोड़ 75 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। वहीं कक्षा 11वीं-12वीं और महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के संचालन हेतु 4,230 करोड़ 82 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।
