वॉशिंगटन, 19 फरवरी (वार्ता) ईरान परमाणु वार्ताओं में अगर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मांगों को लगातार खारिज करता रहा तो अमेरिका उसके खिलाफ जल्द ही सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। सीएनएन की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, श्री ट्रंप ने अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। व्हाइट हाउस को अवगत कराया गया है कि पश्चिमी एशिया में हाल के दिनों में वायु और नौसैनिक संसाधनों की बड़ी तैनाती के बाद अमेरिकी सेना सप्ताहांत तक संभावित हमले के लिए तैयार हो सकती है। एक सूत्र ने यह भी बताया कि श्री ट्रंप निजी तौर पर सैन्य कार्रवाई के पक्ष और विपक्ष दोनों में तर्क दे चुके हैं तथा सर्वोत्तम विकल्प पर सलाहकारों और सहयोगियों से राय ले रहे हैं। पश्चिमी एशिया में अमेरिका की व्यापक सैन्य तैनाती इस ओर संकेत करती है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ बमबारी अभियान शुरू करने की तैयारी कर सकता है। क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या और संसाधन ऐसे बड़े पैमाने के अभियान के लिए पर्याप्त बताये जा रहे हैं, जो कई सप्ताह तक चल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों में ही अमेरिका ने 50 अतिरिक्त एफ-35, एफ-22 और एफ-16 लड़ाकू विमान क्षेत्र में तैनात किये हैं। इसके अलावा एक और विमानवाहक पोत के क्षेत्र की ओर रवाना होने तथा पहले से सैकड़ों स्ट्राइक, समर्थन और कमांड विमानों की मौजूदगी को देखते हुए यह तैनाती असामान्य मानी जा रही है।
पूर्व पेंटागन अधिकारी और अटलांटिक परिषद के सदस्य एलेक्स प्लिट्सस ने इस सैन्य जमावड़े को हाल के दशकों में अभूतपूर्व बताया। उन्होंने कहा कि भूमि-आधारित आक्रमण, विमान, कमान एवं नियंत्रण संसाधन और समुद्र-आधारित प्लेटफॉर्म का ऐसा संयोजन लंबे समय से नहीं देखा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के दिनों में 150 से अधिक सैन्य परिवहन उड़ानों के जरिये हथियार और गोला-बारूद क्षेत्र में पहुंचाया गया है। वहीं, एक्सियोस ने राष्ट्रपति ट्रंप के एक अज्ञात सलाहकार के हवाले से बताया कि आने वाले हफ्तों में ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की संभावना 90 प्रतिशत तक है। ‘द वॉर ज़ोन’ ने ओपन-सोर्स उड़ान ट्रैकिंग डेटा के आधार पर बताया कि यू-2 ड्रैगन लेडी टोही विमान, एफ-16 फाइटिंग फाल्कन, एफ-22 रैप्टर लड़ाकू विमान और ई-3 सेंट्री एयरबोर्न अर्ली वार्निंग विमान अटलांटिक पार कर चुके हैं या हाल ही में यूरोप पहुंचे हैं। इसके अनुसार, अमेरिकी केन्द्रीय कमान के क्षेत्र में इस समय 12 अमेरिकी युद्धपोत सक्रिय हैं और पश्चिमी एशिया में विभिन्न ठिकानों पर 30,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड के क्षेत्र में पहुंचने के बाद यह मध्य पूर्व में तैनात दूसरा अमेरिकी विमानवाहक पोत होगा, जिससे अमेरिकी नौसैनिक वायु शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मौजूदा तैनाती के साथ श्री ट्रंप बिना जमीनी सेना उतारे बड़े पैमाने पर वायु और नौसैनिक अभियान का आदेश दे सकते हैं। शक्ति प्रदर्शन के बावजूद व्हाइट हाउस का कहना है कि राष्ट्रपति की प्राथमिकता अब भी कूटनीति है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा, “कूटनीति हमेशा उनकी पहली पसंद है और ईरान के लिए समझौता करना बुद्धिमानी होगी।” उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस सप्ताह कहा कि ईरान श्री ट्रंप की वार्ता संबंधी कई ऐसी बातों को स्वीकार करने को तैयार नहीं है, जिनसे समझौता नहीं किया जा सकता। अमेरिका के लिए ईरान का परमाणु कार्यक्रम, विशेषकर उच्च संवर्धित यूरेनियम का भंडार, मुख्य चिंता बना हुआ है। इजरायल ईरान के बढ़ते बैलिस्टिक मिसाइल जखीरे पर अधिक ध्यान केन्द्रित कर रहा है। इस बीच, पश्चिमी एशिया में अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति के दामाद जैरेड कुशनर सहित शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों ने व्हाइट हाउस के ‘सिचुएशन रूम’ में राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के साथ हालिया अप्रत्यक्ष वार्ता पर जानकारी दी।

