तेहरान, 17 फरवरी (वार्ता) ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने कहा है कि अमेरिका इस्लामिक गणराज्य के तख्तापलट में कभी कामयाब नहीं होगा और अगर वह ऐसा करने की कोशिश करता है तो ‘दुनिया की सबसे ताकतवर सेना’ को भी गहरे आघात पहुंच सकते हैं। श्री खामेनेई ने पूर्वी अज़रबेजान के लोगों के साथ मंगलवार को एक बैठक में कहा, “अमेरिका के राष्ट्रपति ने अपने एक हालिया बयान में कहा है कि अमेरिका 47 साल तक इस्लामिक गणराज्य को हराने में नाकाम रहा है। उन्होंने अपने ही लोगों से इसकी शिकायत की। यह एक अच्छा इकबालिया बयान है। मैं कहता हूं कि आप (डोनाल्ड ट्रंप) भी यह नहीं कर पाएंगे।”
श्री खामेनेई का यह बयान ऐसे समय में आया है जब श्री ट्रंप ने कहा था कि ईरान में तख्तापलट सबसे अच्छी चीज़ हो सकती है। श्री खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति के उस बयान का भी ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी सेना दुनिया में सबसे ताकतवर है।
उन्होंने कहा, “दुनिया की सबसे ताकतवर सेना को भी कभी ऐसा जख्म मिल सकता है कि वह उठ न सके। वे कहते रहते हैं कि हमने ईरान की ओर युद्धपोत भेज दिया है। युद्धपोत खतरनाक तो है, लेकिन उससे भी खतरनाक वह हथियार है जो उस युद्धपोत को समंदर की तह में पहुंचा सकता है।” उल्लेखनीय है कि अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता का दूसरा दौर भी मंगलवार को जारी रहा। इस बीच, श्री खामेनेई ने कहा कि अमेरिका की धमकियां ईरान को काबू करने की कोशिश का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिका की सत्ता पर काबिज़ भ्रष्ट नेताओं के आगे नहीं झुकेगा। श्री खामेनेई ने कहा, “वे कहते हैं कि परमाणु ऊर्जा पर बातचीत करो, और बातचीत का नतीजा यह रहेगा कि तुम्हारे पास परमाणु ऊर्जा नहीं बचेगी। अगर बातचीत होनी ही है तो पहले से उसका नतीजा निर्धारित कर लेना गलत और बेवकूफाना है।”
श्री खामेनेई ने इसी भाषण में कहा कि देश में आर्थिक तंगी के खिलाफ जनवरी में हुए प्रदर्शनों के दौरान मारे गये लोगों को शहीद माना गया है। उन्होंने कहा, “खून बहा है। हम दुखी हैं। मैं कहता हूं कि हम बहे हुए खून के लिए शोकाकुल हैं।”उल्लेखनीय है कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी के प्रदर्शनों में 3,117 लोगों की मौत हुई है, जबकि गैर-सरकारी संगठनों के अनुसार यह आंकड़ा इससे काफी बड़ा है। श्री खामेनेई ने यह भी कहा कि मरने वाले सभी लोग शहीद की श्रेणी में नहीं आते। इनमें से कुछ भ्रष्ट तत्व और भड़काऊ लोग थे, जबकि बाकियों ने विरोध प्रदर्शन आयोजित करने में कोई भूमिका नहीं निभाई। उन्होंने प्रदर्शनों में मरने वालों को तीन श्रेणियों में बांटा। उन्होंने कहा कि ईरान के मरने वाले शहीदों का दायरा बड़ा है, लेकिन जिन लोगों ने दुश्मन से पैसे और हथियार लिये, वे ‘रिंगलीडर’ हैं और उन्हें शहीद नहीं माना जा सकता। श्री खामेनेई ने ‘भटके हुए प्रदर्शनकारियों’ के लिए दुआ करते हुए अपनी बात खत्म की और कहा कि जनवरी के प्रदर्शन दुश्मन की साजिश थे, न कि एक घरेलू आंदोलन।

