तुर्किए ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ किसी भी रक्षा समझौते में शामिल होने की संभावना को खारिज कर दिया है। अंकारा ने इसके पीछे पाकिस्तानी सेना की कमजोरियां और आर्थिक दबाव गिनाए हैं।
‘इस्लामिक नाटो’ बनाने का सपना देख रहे पाकिस्तान को उसके करीबी दोस्त तुर्किए से बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। तुर्किए के रक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अंकारा न तो सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ किसी रक्षा समझौते का हिस्सा है और न ही भविष्य में ऐसे किसी बहुपक्षीय समझौते पर विचार कर रहा है।
हालांकि पाकिस्तान ने इसके लिए काफी आग्रह किया था लेकिन तुर्किए ने साफ किया कि इन देशों के साथ उसके संबंध वर्तमान में केवल रणनीतिक और द्विपक्षीय सहयोग तक ही सीमित रहेंगे।
पाकिस्तानी सेना की कमजोरियों का विश्लेषण
तुर्किए के रक्षा सूत्रों ने पाकिस्तान के साथ रक्षा संधि न करने के पीछे पाकिस्तानी सेना की वर्तमान स्थिति को मुख्य कारण बताया है। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना वर्तमान में ‘बिखरी हुई’ है और एक साथ तीन मोर्चों (भारत, अफगानिस्तान और ईरान) पर सक्रिय होने के साथ-साथ घरेलू स्तर पर गृहयुद्ध जैसे हालातों का सामना कर रही है।
वरिष्ठ तुर्किए अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान की सुरक्षा सेनाएं पहले से ही अत्यधिक दबाव में हैं, जिससे किसी आपसी रक्षा समझौते के तहत बड़ी जिम्मेदारियां निभाना उनके लिए संभव नहीं लगता।
आर्थिक बदहाली और निवेश की कमी
रक्षा समझौते से पीछे हटने का एक अन्य बड़ा कारण आर्थिक बताया गया है। तुर्किए के अधिकारियों के अनुसार, ‘एक मजबूत अर्थव्यवस्था ही एक मजबूत सेना बनाती है’। वर्तमान में तुर्किए खुद वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है, जबकि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और भी खराब है। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान और तुर्किए की सेनाओं के पास सऊदी अरब के स्तर पर रक्षा आधुनिकीकरण में निवेश करने की वित्तीय क्षमता नहीं है जिसके कारण यह त्रिपक्षीय रक्षा गठबंधन व्यावहारिक नहीं लगता।
