मुंबई | मुंबई की एक विशेष मकोका (MCOCA) अदालत ने शहर की पुलिस को कथित गैंगस्टर कुमार पिल्लई को उसके देश हांगकांग वापस भेजने के लिए आवश्यक कदम उठाने का महत्वपूर्ण आदेश दिया है। विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण आर. नवंदर ने स्पष्ट किया कि पिल्लई को उन सभी मामलों में बरी कर दिया गया है, जिनके लिए उसे मूल रूप से भारत प्रत्यर्पित (Extradite) किया गया था। अदालत ने उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्यर्पण संधि की शर्तों के अनुसार, अनुमति के बिना आरोपी पर भारत में किसी अन्य लंबित मामले में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
कुमार पिल्लई, जो अब हांगकांग का नागरिक है, उसे 2016 में सिंगापुर में गिरफ्तारी के बाद भारत लाया गया था। भारत सरकार ने उसके खिलाफ 6 मामलों में प्रत्यर्पण की मांग की थी, लेकिन कानूनी बाधाओं के कारण केवल 3 मामलों में ही अनुमति मिली थी। पिल्लई के वकील पंकज कावले ने तर्क दिया कि चूंकि उन सभी 3 मामलों में उसे बरी किया जा चुका है और वह अब भारतीय नागरिक नहीं है, इसलिए उसका भारत में रुकना कानूनन वैध नहीं है। अदालत ने माना कि प्रत्यर्पण अधिनियम की धारा 21 के तहत अब उसे वापस भेजा जाना अनिवार्य है।
सरकारी वकील ने पिल्लई की रिहाई और वापसी का यह कहते हुए विरोध किया कि आरोपी के खिलाफ अभी भी कई अन्य गंभीर मामले लंबित हैं। हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि भारतीय अधिकारियों ने अन्य लंबित मामलों के लिए हांगकांग या सिंगापुर से अतिरिक्त अनुमति मांगी थी। अब मुंबई पुलिस को कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए पिल्लई को हांगकांग भेजने की व्यवस्था करनी होगी, जो अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण कानूनों के अनुपालन की दृष्टि से एक बड़ा उदाहरण है।

