कठुआ | भारत और पाकिस्तान के बीच जल राजनीति अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर निर्माणाधीन शाहपुर कंडी बांध का कार्य अपने अंतिम चरण में है और इसके 31 मार्च तक पूर्ण होने की उम्मीद है। इस परियोजना के चालू होते ही रावी नदी का वह पानी, जो अब तक बिना उपयोग के पाकिस्तान बह जाता था, पूरी तरह रोक दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने इस सिंचाई परियोजना के लिए 485.38 करोड़ रुपये की विशेष सहायता मंजूर की है, जिससे कठुआ और सांबा जिलों की करीब 32,173 हेक्टेयर भूमि को नया जीवन मिलेगा।
1960 की सिंधु जल संधि के अनुसार, भारत को पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलज) के पानी पर पूर्ण अधिकार प्राप्त है। तकनीकी बाधाओं के कारण अब तक रावी का पानी सीमा पार जाता था, लेकिन भारत ने अब अपनी नीति में बदलाव किया है। अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए डेटा शेयरिंग रोक दी है। जम्मू-कश्मीर के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह बांध न केवल कृषि विकास और बिजली उत्पादन को बढ़ावा देगा, बल्कि पड़ोसी देश पर रणनीतिक दबाव बनाने का भी एक बड़ा हिस्सा है।
शाहपुर कंडी बांध की यात्रा चुनौतियों भरी रही है। साल 2001 में पहली बार मंजूरी मिलने के बाद यह प्रोजेक्ट अंतर्राज्यीय विवादों में फंसा रहा, जिसे 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर दोबारा शुरू किया गया। वर्तमान में यह परियोजना ‘मिशन मोड’ में संचालित हो रही है ताकि पानी के अपव्यय को रोका जा सके। अधिकारियों का मानना है कि यह कदम सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ एक कड़ा संदेश है। जल संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए भारत द्वारा अपने हिस्से के पानी का पूर्ण उपयोग करना एक बड़ा झटका साबित होगा।

