राजगढ: नगर में शिव बारात पारंपरिक उल्लास और भक्ति भाव के साथ निकाली गई. बारात में स्थानीय सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं की विशेष झलक देखने को मिली. दो दर्जन से अधिक स्थानों पर बारात मार्ग पर झांकिया सजाई गई.
दोपहर में पूजा-अर्चना, आरती के बाद शिवजी की छतरी से बारात शुरु हुई. शिव भक्तों ने पारंपरिक बिनौरी नृत्य प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. भूत-प्रेत गणों के वेश में लोग शामिल हुए, समूचा वातावरण शिवमय हो गया. बारात में लोग जमकर नाचे. इंदौर से आए कलाकारों ने नगर के प्रमुख चौराहों पर विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का जीवंत चित्रण किया जो आकर्षण का केंद्र बना रहा. बारात सब्जी बाजार, ब्यावरा नाका होते हुए बिरसा मुंडा चौराहे, पारायण चौक, तिल्ली चौक, बड़ चौक, गांधी चौक और किला मार्ग घूम घाटी से गुजरती हुई खोयरी बैजनाथ महादेव मंदिर पहुंची. मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा और ठंडाई सहित जलपान से स्वागत किया.
शिव पार्वती विवाह हुआ
खोयरी धाम पहुंचने पर मंदिर पुजारी अरुण शर्मा, उमेश शर्मा सहित मंदिर समिति सदस्यों और उपस्थित श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा कर स्वगात किया गया. इसके बाद मंत्रोचारण के साथ विधि विधान से शिव पार्वती विवाह संपन्न हुआ. शाम को महाआरती के बाद प्रसाद वितरण हुआ.
उज्जैन के साफे से सजे शिव
नगर के बायपास रोड पर खिलचीपुर नाके के समीप स्थित श्री अंजनीलाल धाम के नर्मदेश्वर महादेव को बाबा महांकाल की तरह सजाया गया. पंडित देवेंद्र बैरागी के अनुसार शिवरात्रि पर्व पर दूल्हे के स्वरूप में श्रृंगार करने के लिए उज्जैन से विशेष आकार का साफा मंगवाया गया. इसी प्रकार नेवज नदी के छोटे पुल के समीप स्थित ऐसी वाले हनुमान मंदिर पर 108 सुंदरकाण्ड पाठ का आयोजन किया गया.
