सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश पंचायत चुनाव की समय सीमा बढ़ाई

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश पंचायत चुनाव की समय सीमा बढ़ाई

नयी दिल्ली (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को पंचायत और नगर पालिका चुनावों पर उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को स्वीकार कर लिया और चुनाव कराने की समय सीमा बढ़ा दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के लिए चुनाव प्रक्रिया 31 मई, 2026 तक या उससे पहले पूरी करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि आरक्षण सूची को 31 मार्च, 2026 तक अंतिम रूप देकर लागू कर दिया जाए। महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) अनूप रतन ने बताया कि शीर्ष न्यायालय ने एसएलपी स्वीकार कर ली है और राज्य में पंचायत चुनाव की समय सीमा बढ़ा दी है।

इससे पहले उच्च न्यायालय ने राज्य को 28 फरवरी तक आरक्षण सूची जारी करने और 30 अप्रैल, 2026 से पहले चुनाव कराने का निर्देश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने शीर्ष न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें राज्य के कई हिस्सों में भारी हिमपात , सड़क अवरोध और आपदा संबंधी व्यवधानों के कारण उत्पन्न व्यावहारिक कठिनाइयों का हवाला दिया गया था। सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने तर्क दिया कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की पीठ ने आरक्षण प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया था। यह भी बताया गया कि दूरस्थ और बर्फ से ढके क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की समस्याओं के कारण पूर्व निर्धारित समय सीमा का पालन करना मुश्किल था। याचिका में आपदा प्रबंधन अधिनियम की प्रयोज्यता से संबंधित प्रश्न भी उठाए गए, जो हिमाचल प्रदेश में अभी भी लागू है। राज्य ने यह स्पष्टीकरण मांगा कि क्या ऐसी परिस्थितियों में चुनाव अस्थायी रूप से स्थगित किए जा सकते हैं, और केंद्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम और राज्य पंचायती राज अधिनियम के बीच संभावित कानूनी विरोधाभास की ओर इशारा किया।

राज्य की दलीलों को सीमित रूप से स्वीकार करते हुए, शीर्ष न्यायालय ने उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित समय सीमा से आगे एक महीने का अतिरिक्त समय दिया, लेकिन यह भी कहा कि चुनाव अनिश्चित काल के लिए स्थगित नहीं किए जाने चाहिए। राज्य में 3,577 पंचायतों और 73 शहरी स्थानीय निकायों में चुनाव होने हैं। वर्तमान में इनमें से कई संस्थाओं का प्रबंधन प्रशासकों द्वारा किया जा रहा है, ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश ने हिमाचल प्रदेश में निर्वाचित स्थानीय शासन की बहाली के लिए एक निश्चित समय सीमा निर्धारित कर दी है।

 

 

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