उज्जैन:मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा घोषित एलिवेटेड ब्रिज योजना अब तेजी से धरातल पर उतरती नजर आ रही है. 13 मई 2025 को मुख्यमंत्री ने उज्जैन में एलिवेटेड ब्रिज निर्माण की घोषणा की थी.
सीएम की घोषणा का उद्देश्य विकास को गति देना, ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाना और श्रद्धालुओं व व्यापारियों दोनों को राहत देना है. अब इस ऐतिहासिक योजना के लिए टेंडर प्रक्रिया की तैयारी शुरू हो चुकी है और लोक निर्माण विभाग की सेतु निगम टीम लगातार सर्वे व तकनीकी कवायद में जुटी हुई है.
ऊपर गाड़ियां, नीचे व्यापार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया था कि एलिवेटेड ब्रिज इस तरह बनाया जाएगा कि नीचे व्यापार निर्बाध चलता रहे और ऊपर से वाहनों की आवाजाही हो सके. भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसी ब्रिज के ऊपर पिलर जोड़कर मेट्रो संचालन की भी प्लानिंग की जाएगी. उस समय यह घोषणा कई लोगों को असंभव सी लगी थी, लेकिन अब उज्जैन को तेजी से विकास के पंख लगते दिखाई दे रहे हैं.
निकास से इंदौर गेट तक ब्रिज
निकास चौराहा से बुधवारिया होते हुए इंदौर गेट तक एलिवेटेड ब्रिज बनाने की योजना पर गंभीरता से काम चल रहा है. मुख्यमंत्री ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना सैनिक भेजे रावलपिंडी में हमला कर दिया, तो उज्जैन में भी बिना किसी मकान को छुए ऊपर ही ऊपर एलिवेटेड ब्रिज बनाया जाएगा. इस सोच के पीछे यही मंशा है कि नीचे कारोबार चलता रहे और ऊपर से ट्रक व अन्य भारी वाहन गुजर सकें.
कमिश्नर कलेक्टर जुटे
कलेक्टर रोशन कुमार सिंह से लेकर सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह तक इस परियोजना को लेकर पूरी शिद्दत से लगे हुए हैं. सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए सर्वे कार्य लगातार जारी है, ताकि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के दौरान ट्रैफिक दबाव को कम किया जा सके.
महामृत्युंजय द्वार से हरिफाटक तक
इसी तरह इंदौर रोड पर महामृत्युंजय द्वार से हरी फाटक ब्रिज तक एलिवेटेड ब्रिज निर्माण के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिए हैं. इस परियोजना की ड्राइंग और डिजाइन एमपीआरडीसी द्वारा तैयार की जा रही है. अनुमान है कि वर्ष 2028 में इसी मार्ग पर सबसे अधिक ट्रैफिक लोड रहेगा. इंदौर-उज्जैन फोरलेन को सिक्स लेन में बदला जा रहा है, जिसका लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है. इसी सिक्स लेन के ऊपर एलिवेटेड ब्रिज का निर्माण प्रस्तावित है.
सिंहस्थ में बहुउपयोगी
मकोडिया आम चौराहे से चामुंडा चौराहे तक प्रस्तावित एलिवेटेड ब्रिज की लंबाई लगभग 3.5 किलोमीटर और चौड़ाई करीब 25 मीटर होगी. वहीं निकास चौराहे से इंदौर गेट तक बनने वाला एलिवेटेड ब्रिज डेढ़ किलोमीटर से अधिक लंबा और लगभग 11 मीटर चौड़ा होगा, जो टू लेन रहेगा. इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर मंथन अंतिम चरण में है और सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी.
1050 करोड़ से निर्माण
लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री अवनेंद्र सिंह ने बताया कि दोनों एलिवेटेड ब्रिज की कुल लागत लगभग 1050 करोड़ रुपये होगी, जिसमें भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य दोनों शामिल हैं. यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो अप्रैल तक निर्माण कार्य प्रारंभ हो सकता है और दो वर्षों में एलिवेटेड ब्रिज बनकर तैयार हो जाएगा.
जाम से निजात मिलेगी
इन एलिवेटेड ब्रिज के निर्माण से उज्जैन शहर में लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलेगी, महाकाल मंदिर आने-जाने में सुविधा बढ़ेगी और कई प्रमुख मार्ग आपस में जुड़ जाएंगे. साथ ही सिंहस्थ 2028 के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा. यह परियोजना उज्जैन के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है
