हजारों बोरी धनिये की आवक सैकड़ो में सिमटी, बोवनी का रकबा घटने से नाममात्र आ रही आवक

ब्यावरा। क्षेत्र एवं जिले में एक समय धनिया फसल का रकबा इतना अधिक था कि जब कटाई होकर धनिया मंडियो में आता था तो मंडी परिसर ही नहीं अपितु आसपास समूचा क्षेत्र धनिये की महक में सराबोर हो जाता था किंतु आज मंडी में नाममात्र ही धनिया फसल पहुंच पा रही है.

विदित है कि आज से डेढ़ दशक पूर्व तक ब्यावरा के आसपास क्षेत्र में एक बड़े रकबे में धनिया फसल का उत्पादन होता था. परन्तु प्राकृतिक आपदाओं के कारण धनिया फसल को नुकसान पहुंचने से धनिया फसल से दूरी बनने लगी. आज स्थिति यह है कि हजारों बोरी की आवक सैकड़ो बोरी पर आकर सिमट गई है.

60 से 70 हजार हैक्टर में था रकबा

करीब डेढ़ दशक पूर्व तक जिले में धनिया फसल का रकबा 60 से 70 हजार हैक्टर तक था. जो धीरे-धीरे घटने लगा. प्राय: मावठा, शीत लहर सहित अन्य प्राकृतिक प्रकोप के कारण धनिया फसल को होने वाले अधिक नुकसान को देखते हुए धनिया फसल से दूरी होने लगी. साथ ही पानी की उपलब्धता से भी धनिया का रकबा घटने लगा.

वर्तमान में मंडी में धनिये की आवक

फरवरी माह के इन दिनों में स्थानीय कृषि मंडी में धनिया की अच्छी आवक होने लगती थी किंतु साल दर साल धनिया का रकबा घटने से आवक भी कम होने लगी. वर्तमान में धनिया की आवक इस प्रकार है. 5 फरवरी को धनिये की आवक 99 क्विंटल रही जबकि भाव न्यूनतम 8 हजार तथा उच्चतम 10 हजार 440 रुपये रहा. 6 फरवरी को आवक 70 क्विंटल तथा भाव न्यूनतम 6 हजार 710 तथा उच्चतम भाव 11 हजार 80 रुपये रहा. वर्तमान में धनिया के अच्छे भाव स्थानीय मंडी में देखे जा रहे है.

ब्यावरा विसं में था धनिया का काफी रकबा

पूर्व के वर्षो में ब्यावरा विकासखंड में धनिया का उत्पादन काफी होता था. ब्यावरा, सुठालिया, लखनवास, मलावर, कानेड़ सहित अन्य जगहों पर धनिया का रकबा काफी था. परन्तु धीरे-धीरे धनिया का रकबा कम होकर गेहूं, सरसों, प्याज, लहसुन का रकबा बढऩे लगा.

जब क्लब ग्राउण्ड पर लगाना पड़ी थी मंडी

स्थानीय कृषि मंडी में धनिया फसल की होने वाली आवक का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अधिक आवक के चलते मंडी के समीप क्लब ग्राउण्ड के मैदान में तक मंडी लगाना पड़ी थी.

देश भर में पहुंचता है यहां का धनिया

ब्यावरा स्थित कृषि मंडी में नीलामी के बाद खरीदा जाने वाला धनिया देश के कई राज्यों में पहुंचता है. साउथ सहित उत्तर प्रदेश, बिहार व अन्य राज्यों में धनिया जाता है. एक समय धनिया की मांग को पूरा करने वाली स्थानीय मंडी मुख्य रही है.

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