ग्वालियर: इंजीनियर आकर्ष पाठक ने हाथ में रखी 51 लाख रुपये की दहेज राशि जैसे ही सम्मानपूर्वक वापस की, वहां मौजूद लोग कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गए लेकिन यह दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत सामाजिक संदेश था। उन्होंने सिर्फ शगुन का एक नारियल लिया। भिंड जिले के पाठक परिवार ने यह कदम उठाकर साफ कर दिया कि उनके लिए विवाह कोई लेन-देन नहीं, बल्कि दो परिवारों और दो संस्कारों का मेल है। दहेज के नाम पर मिली पूरी राशि लौटाते हुए परिवार ने केवल 1 रुपया और एक नारियल स्वीकार किया।
यह दृश्य कई लोगों की आंखें नम कर गया।आकर्ष पाठक वर्तमान में छत्तीसगढ़ में इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। उनके पिता अनोज पाठक, जो भिंड की एक मार्केटिंग सोसायटी में असिस्टेंट मैनेजर हैं, ने बताया कि दहेज न लेने का निर्णय अचानक नहीं लिया, बल्कि यह वर्षों पुराना संकल्प है। जब शादी के दौरान लड़की पक्ष को दहेज की राशि लौटाई गई तो वे पहले असमंजस में पड़ गए। उन्हें लगा कि कहीं लड़के वालों को किसी बात की नाराजगी तो नहीं। लेकिन अनोज पाठक और उनकी पत्नी मनोरमा पाठक ने तुरंत स्पष्ट किया कि यह फैसला नाराजगी का नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने की सोच का हिस्सा है।
