नई दिल्ली | अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ महज 80 गेंदों में 175 रनों की तूफानी पारी खेलने वाले बिहार के लाल वैभव सूर्यवंशी वर्तमान में क्रिकेट जगत के सबसे बड़े ‘सेंसेशन’ बन चुके हैं। हालांकि, उनकी अद्भुत फॉर्म के बावजूद वे अभी सीनियर भारतीय टीम (Team India) का हिस्सा नहीं बन सकते। आईसीसी (ICC) के 2020 में लागू हुए नियम के अनुसार, किसी भी खिलाड़ी की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए न्यूनतम आयु 15 वर्ष होनी चाहिए। वैभव का जन्म 27 मार्च 2011 को हुआ था, जिसका अर्थ है कि वे 27 मार्च 2026 से पहले तकनीकी रूप से सीनियर टीम के लिए योग्य नहीं माने जाएंगे।
हैरानी की बात यह है कि वैभव जहाँ सीनियर टीम के लिए अभी छोटे हैं, वहीं वे दोबारा अंडर-19 वर्ल्ड कप भी नहीं खेल पाएंगे। बीसीसीआई (BCCI) के सख्त नियमों के मुताबिक, कोई भी खिलाड़ी अपने जीवन में केवल एक ही बार अंडर-19 विश्व कप का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि हर बार नए टैलेंट को मौका मिले। वैभव ने 2026 के इस टूर्नामेंट में 30 छक्के जड़कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है और ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ भी बने हैं, लेकिन अब उम्र होने के बावजूद वे अगले अंडर-19 विश्व कप में नजर नहीं आएंगे।
भले ही तकनीकी नियमों के कारण उन्हें थोड़ा इंतजार करना पड़े, लेकिन पिछले 12 महीनों में वैभव ने रिकॉर्ड्स की झड़ी लगा दी है। उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी में 59 गेंदों में 150 रन बनाकर एबी डिविलियर्स का रिकॉर्ड तोड़ा और आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए मात्र 35 गेंदों में शतक जड़कर सबसे युवा शतकवीर बने। लिस्ट-ए क्रिकेट में 14 साल की उम्र में शतक लगाने वाले वे दुनिया के पहले खिलाड़ी हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही वे 15 वर्ष की आयु पूरी करेंगे, चयनकर्ताओं के लिए उन्हें सीनियर टीम से बाहर रखना नामुमकिन होगा।

