14 साल का लड़का और एक जिद्दी बाप! समस्तीपुर की तंग गलियों से निकलकर कैसे विश्व विजेता बना वैभव सूर्यवंशी?

अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में जब वैभव सूर्यवंशी ने 15 छक्कों की मदद से 175 रन बनाए और ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ बने, तो उनके पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे।

बिहार के समस्तीपुर से निकलकर अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 में दुनिया को अपनी बल्लेबाजी का मुरीद बनाने वाले वैभव सूर्यवंशी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। 14 साल की उम्र में 175 रनों की विश्व रिकॉर्ड पारी खेलने वाले इस ‘वंडर बॉय’ के पीछे उनके पिता संजीव सूर्यवंशी का अटूट विश्वास और वर्षों का कड़ा संघर्ष छिपा है।

वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी स्वयं क्रिकेट के बड़े शौकीन थे, लेकिन आर्थिक और पारिवारिक कारणों से वे बड़े स्तर पर नहीं खेल सके। उन्होंने अपनी आंखों में अधूरा रह गया सपना बेटे की आंखों में देखा। जब वैभव मात्र 6 साल के थे, तभी संजीव ने उनके भीतर की प्रतिभा को पहचान लिया था। बेटे को बेहतर ट्रेनिंग दिलाने के लिए उन्होंने समस्तीपुर के छोटे से गांव से लेकर बड़े मैदानों तक का सफर तय किया।

मैदान के अभाव में खेतों से शुरू हुई प्रैक्टिस

एक वक्त ऐसा भी था जब वैभव के पास प्रैक्टिस के लिए अच्छे मैदान नहीं थे। संजीव सूर्यवंशी ने अपने खेतों में ही पिच तैयार करवाई और खुद बेटे को घंटों प्रैक्टिस कराने लगे। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने वैभव की किट और डाइट में कभी कोई कमी नहीं आने दी। संजीव बताते हैं कि उन्होंने अपनी जमा-पूंजी वैभव के ट्रेनिंग पर लगा दी क्योंकि उन्हें यकीन था कि उनका बेटा एक दिन देश का नाम रोशन करेगा।

महज 12 साल की उम्र में रणजी का सफर

पिता के अनुशासन और वैभव की मेहनत का नतीजा यह रहा कि वैभव ने उम्र के हर पड़ाव पर रिकॉर्ड तोड़े। महज 12 साल की उम्र में बिहार के लिए रणजी डेब्यू कर उन्होंने सबको चौंका दिया था। उनके पिता हर मैच में उनके साथ रहते और उनकी कमियों को सुधारने के लिए वीडियो एनालिसिस तक का सहारा लेते थे।

फाइनल में वैभव का आक्रमक अंदाज

अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में जब वैभव सूर्यवंशी ने 15 छक्कों की मदद से 175 रन बनाए और ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ बने, तो उनके पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे। वैभव ने भी अपनी जीत के बाद कहा कि मेरे पिता मेरे सबसे बड़े कोच और सपोर्टर हैं। अगर उन्होंने मुझ पर भरोसा नहीं किया होता, तो मैं आज यहां नहीं होता।

 

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