नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने 1 फरवरी 2026 से सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर नया एक्साइज ड्यूटी स्ट्रक्चर लागू कर दिया है, जिससे इनकी कीमतों में भारी उछाल आया है। नई व्यवस्था के तहत पुराने कंपेंसेशन सेस को हटाकर 40 प्रतिशत जीएसटी और सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति स्टिक अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगाई गई है। अब 65 मिमी तक की छोटी फिल्टर सिगरेट पर प्रति स्टिक लगभग ₹2.10 और प्रीमियम लंबी सिगरेट पर ₹5.40 तक का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। सरकार का यह कदम भारतीय तंबाकू कर व्यवस्था को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 75 प्रतिशत कर बोझ के वैश्विक मानकों के करीब लाने के लिए उठाया गया है।
चबाने वाले तंबाकू, खैनी और गुटखा जैसे उत्पादों के लिए अब ‘एमआरपी आधारित मूल्यांकन’ व्यवस्था शुरू की गई है, जिससे अब टैक्स निर्माण लागत के बजाय पैकेट पर छपी खुदरा कीमत पर वसूला जाएगा। पान मसाला पर नया ‘हेल्थ एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस’ लागू होने से कुल टैक्स बोझ 88 प्रतिशत तक पहुँच सकता है, जबकि गुटखा पर यह 91 प्रतिशत तक होगा। इसके अलावा, अब पान मसाला निर्माताओं के लिए अपनी मशीनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसकी रिकॉर्डिंग उन्हें 24 महीने तक सुरक्षित रखनी होगी। यह कदम टैक्स चोरी रोकने और उत्पादन की निगरानी के लिए उठाया गया है।
क्रिसिल रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस भारी टैक्स वृद्धि के कारण अगले वित्त वर्ष में घरेलू सिगरेट उद्योग की बिक्री में 6 से 8 प्रतिशत तक की गिरावट आने की संभावना है। जहाँ एक ओर सरकार का ध्यान सार्वजनिक स्वास्थ्य और राजस्व बढ़ाने पर है, वहीं विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वैध सिगरेट महंगी होने से अवैध तस्करी और नकली उत्पादों का बाजार बढ़ सकता है। इसके बावजूद, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि मशीनों की संख्या और उत्पादन क्षमता की जानकारी छुपाने वाले निर्माताओं के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

