ईवीएम शेयरिंग से मप्र निर्वाचन आयोग की बढ़ी कमाई, राजस्थान को 90 हजार मशीनें किराये पर दीं 

भोपाल। मप्र राज्य निर्वाचन आयोग अब ईवीएम को किराये पर भी देने लगा है, जिससे उसकी आय भी होने लगी है, इसका प्रयोग पहले भी छत्तीसगढ़, जम्मू कश्मीर, सिक्किम एवं महाराष्ट्र के स्थानीय चुनावों के कर चुका है. जो मप्र राज्य निर्वाचन आयोग की उपलब्धि है. इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए मंगलवार को मप्र और राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग के बीच जयपुर में ईवीएम मशीनों को किराये पर देने के लिए अनुबंध हुआ. अनुबंध के दौरान मप्र और राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग के निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव सचिव दीपक सिंह एवं राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त राजेश्वर सिंह वहां के सचिव राजेश वर्मा ने अनुबंध पर हस्ताक्षर कियेे. इस अनुबंध के तहत राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग को 30,000 कंट्रोल यूनिट एवं 60,000 वैलिड यूनिट को लोन बेस पर किराए पर दिया जाएगा, जो 4 महीने की अवधि के लिए रहेगा. जिससे वहां पर स्थानीय निर्वाचन ईवीएम मशीनों से करवाया जा सके. इस अनुबंध से राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग से मप्र लगभग 3 करोड़ रुपए की राशि भी मिली है.

1500 करोड़ रुपए की राजस्व बचत

मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की इस शेयरिंग पॉलिसी से राजकीय कोष को राजस्व मिल रहा है, वहीं पर नई ईवीएम मशीन खरीदने में राज्यों की फंड की भी बचत हो रही है. मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की इस पहल से देश के लगभग 1000 से 1500 करोड़ रुपए की राजस्व बचत भी हो रही है.

इनका कहना है

मतदान में पारदर्शिता लाने और पूरी तरह से ईवीएम से कराने के लिए यह अनुबंध किया गया है साथ आयोग को राजस्व का लाभ भी होगा.

मुकुल कुमार गुप्ता, उप सचिव एवं राज्य नोडल अधिकारी,

मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग भोपाल

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