
इंदौर. किराये पर ली गई कारों की हेराफेरी कर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने वाले शातिर आरोपी के खिलाफ थाना अन्नपूर्णा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अब तक 38 कारें जब्त की हैं, जिनकी कीमत 5 करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है. आरोपी पिछले 15 दिनों से पुलिस रिमांड पर है और उससे लगातार सघन पूछताछ की जा रही है.
अन्नपूर्णा थाने में आरोपी के खिलाफ अब तक धोखाधड़ी के चार अपराध दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि पूछताछ के दौरान दो और नए मामलों का खुलासा हुआ है. आरोपी के खिलाफ इंदौर और उज्जैन के अलग-अलग थानों में पूर्व से भी धोखाधड़ी और जालसाजी के नौ प्रकरण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है. पुलिस के अनुसार 20 जनवरी 2026 को न्यू गोरी नगर निवासी एक निजी कर्मचारी ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. फरियादी ने बताया कि उसने जनवरी 2025 में एक मारुति स्विफ्ट कार खरीदी थी, जिसे अगस्त 2025 में केशरबाग रोड स्थित एक कार वॉशिंग सेंटर संचालक को 24 हजार रुपए प्रतिमाह किराये पर दिया गया था. 11 माह का लिखित अनुबंध भी किया था. आरोपी ने केवल दो माह का किराया दिया, इसके बाद भुगतान बंद कर दिया. बाद में फरियादी को पता चला कि उसकी कार किसी अन्य व्यक्ति के पास गिरवी रख दी गई है. शिकायत के आधार पर थाना अन्नपूर्णा में धोखाधड़ी की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया. इसी तरह के मामलों में अन्य फरियादियों की रिपोर्ट पर आरोपी के खिलाफ दो और अपराध दर्ज किए. प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी और वाहनों की बरामदगी के निर्देश दिए थे. इसके बाद जोन-4 के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित कर आरोपी को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक प्रकरण दर्ज होने के बाद थाने पर करीब 40 से अधिक आवेदकों ने भी आवेदन दिए, जिनमें बताया गया कि उन्होंने भी अपनी कारें आरोपी को किराये पर दी थीं. जांच के दौरान अब तक 38 कारें जब्त की जा चुकी हैं, जिनमें ऑडी, इनोवा क्रिस्टा, थार, स्कॉर्पियो-एन, फ्रॉन्क्स जैसी महंगी गाड़ियां शामिल हैं. आरोपी फिलहाल 3 फरवरी तक पुलिस रिमांड पर है और अन्य प्रकरणों में भी रिमांड लेकर पूछताछ की जा रही है. गिरफ्तार आरोपी इंदौर के सुदामा नगर क्षेत्र का रहने वाला है. पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी कार मालिकों को ऊंचे किराये का लालच देकर 11 महीने का एग्रीमेंट करता था. इसके बाद कारों को अन्य लोगों के पास गिरवी या किराये पर देकर मोटी रकम वसूल लेता था. शुरुआती कुछ महीनों तक किराया देने के बाद भुगतान बंद कर देता और वाहनों में लगे जीपीएस भी निकलवा देता था. जब वाहन मालिक दबाव बनाते थे तो आरोपी आंशिक रकम देकर दोबारा भरोसे में ले लेता था और कानूनी मामलों में फंसाने की धमकी भी देता था.
