नयी दिल्ली, 03 फरवरी (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर सुनवाई 10 फरवरी तक के लिए टाल दी है। ईडी ने अपनी याचिका में पश्चिम बंगाल सरकार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार और अन्य अधिकारियों पर कोलकाता में राजनीतिक परामर्श फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पीएसी) के ऑफिस में एजेंसी की तलाशी अभियान में बाधा डालने का आरोप लगाया है। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मंगलवार को ईडी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से दायर किए गए काउंटर-शपथ पत्र का जवाब देने के लिए समय मांगने पर सुनवाई को 10 फरवरी तक के लिए टाल दिया। श्री मेहता ने बताया कि ईडी को राज्य सरकार का जवाब आज ही मिला है और उसे इसकी जांच करने तथा जवाब दाखिल करने के लिए समय चाहिए। अनुरोध स्वीकार करते हुए पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी को तय की।
ईडी की याचिका आठ जनवरी को आई-पैक के दफ्तर और इसके सह संस्थापक प्रतीक जैन के घर पर कोयला घोटाले से जुड़े हवाला कारोबार की जांच के सिलसिले में की गई तलाशी से जुड़ी है। एजेंसी ने आरोप लगाया कि अभियान के दौरान उसके अधिकारियों को रोका गया और मुख्यमंत्री पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मौके पर पहुंची और ईडी अधिकारियों से बहस की। ईडी ने आरोप लगाया है कि छापे के दौरान मुख्यमंत्री और अन्य नेता कुछ फ़ाइलें लेकर चले गये, जिससे जांच में रुकावट आई और उसके अधिकारियों पर दबाव पड़ा। शीर्ष अदालत में दायर याचिका में ईडी ने मुख्यमंत्री, पूर्व डीजीपी और कोलकाता पुलिस के आयुक्त प्राथमिकी दर्ज करने की इजाजत मांगी है। साथ ही इस मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से स्वतंत्र जांच की भी मांग की है।

