नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी ने तीन दिवाला खातों में लाभ दिया, सरकार की पूंजी चुकाई

नयी दिल्ली, 29 जनवरी (वार्ता) नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (एनएआरसीएल) ने तीन अधिग्रहीत दिवाला कंपनियों के खातों के माध्यम से अब लाभ का वितरण शुरू कर दिया है और सरकार की पूरी प्रतिभूति चुकता कर दी है। यह जानकारी वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू की अध्यक्षता में कंपनी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ बैठक में दी गयी । बैठक को बताया गया कि एनएआरसीएल द्वारा अधिग्रहित खातों की संख्या 29 से बढ़कर 30 हो गई है, जिससे कुल अधिग्रहित ऋण जोखिम का आंकड़ा लगभग 1.63 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ऐसे खातों की पहचान भी की गई है जो वर्तमान पाइपलाइन में हैं, जिनसे अधिग्रहण का कुल आंकड़ा दो लाख करोड़ रुपये (एनएआरसीएल के लिए परिकल्पित लक्ष्य) के करीब पहुंच सकता है। वित्त मंत्रालय की गुरुवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही की इस पहली बैठक में आगामी तिमाही की आकांक्षाओं पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ तीसरी तिमाही के प्रदर्शन पर चर्चा की गई। विज्ञप्ति के अनुसार गत आठ अक्टूबर को इससे पिछली तिमाही की समीक्षा के बाद से एनएआरसीएल वसूली में लगभग 1,439 करोड़ रुपये की शुद्ध वृद्धि हुई है और कुल वसूली 5,496 करोड़ रुपये तक पहुंच गयी है।

इस वसूल पूंजी में 4,803 करोड़ रुपये की प्रतिभूति की रसीद (एसआर) के आधार पर प्राप्त राशियां शामिल हैं। बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि एनएआरसीएल ने तीन खातों में प्रतिभूतियों से जुटाई गयी 100 प्रतिशत सिक्योरिटी रिसीप्ट्स (एसआर) का पैसा प्राप्त कर लिया गया है और इसमें लाभ का अतिरिक्त हिस्सा ऋणदाताओं को वितरित कर दिया गया है। बैठक में उन तरीकों पर विचार-विमर्श किया गया जिनसे अधिग्रहण की प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम किया जा सके। विभेदक सुरक्षा संरचनाओं, अतिरिक्त गिरवी और मूल्यांकन पर असहमति के कारण ऋणदाताओं से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की गई, जिनकी वजह से अधिग्रहण में अधिक समय लगता है। सचिव, डीएफएस ने इस बात पर जोर दिया कि अधिग्रहण प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम करने के लिए ऋणदाताओं और एनएआरसीएल दोनों को अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऋणदाताओं को संयुक्त ऋणदाता बैठक (जेएलएम) में लिए गए निर्णयों पर टिके रहने के ‘धर्म’ का पालन करना चाहिए। समाधान के मोर्चे पर हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अधिग्रहित खातों की वसूली और समाधान के माध्यम से जनता का पैसा वापस लाने की दिशा में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

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