
जबलपुर। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने ट्रायल कोर्ट का वह आदेश निरस्त कर दिया, जिसके तहत पुलिस को बिना प्रारंभिक जांच के एफआइआर दर्ज कर आगे कार्रवाई का निर्देश दे दिया गया था। कोर्ट ने साफ किया कि बीएनएएस की धारा 379 के तहत दायर किए गए आवेदन पर न्यायालय द्वारा एफआइआर दर्ज करने पर निर्णय लेना आवश्यक है। पुलिस का कार्य सिर्फ जांच कर रिपोर्ट पेश करना है, पुलिस को एफआइआर दर्ज करने का विवेकाधिकार नहीं दिया जा सकता है। मामला भोपाल निवासी शैलेंद्र शर्मा की याचिका से संबंधित था, जिसके जरिए ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि बीएनएएस की धारा 379 सीआरपीसी की धारा-340 की तरह है, जिसके तहत पुलिस सीधे एफआइआर दर्ज नहीं कर सकती। उसका कार्य जांच करके कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट पेश करना होता है। यदि कोर्ट एफआइआर का पुख्ता आधार पाती है, तभी एफआइआर दर्ज हो सकती है।
