जबलपुर: गुलौआ तालाब में ऑक्सीजन की कमी और आसपास फैल गंदगी के कारण हजारों की संख्या में मछलियां मर रहीं हैं। हैरानी की बात ये है कि इस मूक मछलियों की मौतों की जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की ओर से कोई लेने तैयार नहीं है। एक तरफ जब जिम्मेदार जल विभाग के कमलेश श्रीवास्तव खुद मान रहे हैं कि गुलौआ तालाब में ऑक्सीजन की कमी से मछलियों की मौतें हो रहीं हैं तो फिर समय रहते गुलौआ तालाब का ऑक्सीजन लेवल ठीक क्यों नहीं किया, क्यों फिर फुव्वारे फाउंटेन कुछ घंटे चलाकर बंद कर दिए गए, ये सारे सवाल अब निगम प्रशासन के जिम्मेदारों को मुंह सा चिढ़ा रहा है। मछलियों की मौतों के बाद जिम्मेदारों ने ये जरूर कह दिया कि गुलौआ तालाब में क्षमता से अधिक मछलियां हो गईं थीं इसलिए ऑक्सीजन लेवल घटा और उनकी मौत हो गई। इस जवाब ने पशु प्रेमियों को जहां एक ओर झंकझोर दिया तो वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदारों के प्रति लोगों ने नाराजगी भी जाहिर की।
जांच के लिए लैब क्यों नहीं भेज रहे पानी ?
जानकारी के अनुसार पिछले 3 दिनों से लगातार गुलौआतालाब में मछलियां दम तोड़ रहीं हैं और सुबह पानी में उतराते हुए उनकी लाशें दिख रहीं हैं । मार्निंग वॉक करने तालाब पहुंच रहे लोगों व पशुप्रेमियों ने नवभारत को बताया कि जिम्मेदार समय पर जाग जाते तो शायद मछलियों की जान बच सकती थी। उधर बड़ी संख्या में मछलियों की मौतों से दुर्गंध भी गुलौआ तालाब के पास फैल रही है जिससे स्थानीय लोगों में अलग आक्रोश व्याप्त है। जानकारों का कहना है कि नगर निगम के जिम्मेदारों को गुलौआ तालाब का पानी जांच के लिए लैब भेजना चाहिए। जिससे मछलियों की मौतों की असली वजह का पता लग सके।
नगर निगम प्रशासन अपनाए है उदासीन रवैया: नेता प्रतिपक्ष
गुरूवार को नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा, पूर्व पार्षद संजय राठौर, युवा कांग्रेस के सचिन वाजपेई सहित अन्य कांग्रेसियों के साथ गुलौआताल का निरीक्षण करने पहुंचे जिस दौरान उन्होनें पाया कि नगर निगम के सिर्फ 2 कर्मचारी ही मरी हुईं मछलियों को तालाब से बाहर निकालने में लगे हुए थे जबकि पिछले 3 दिन से गुलौआतालाब में मछलियां मर रहीं हैं। नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा ने इस दौरान कहा कि नगर निगम प्रशासन उदासीन रवैया अपनाए हुए है जिसका खामियाजा मूक जानवर, पशु अपनी जान गंवाकर भुगत रहे हैं।
इनका कहना है-
–गुलौआताल में ऑक्सीजन लेवल कम हो रहा था आौर मछलियों की संख्या बहुत बढ़ गई थी। जिस कारण मछलियों की मौत हुई है। अमले द्वारा मरी हुईं मछलियों को तालाब से बाहर निकाला गया है और साथ ही गुलौआताल में मौजूद अतिरिक्त मछलियों को सुरक्षित शहर के बड़े तालाबों में शिफ्ट कराया गया है।
–अंकिता बर्मन, स्वास्थ्य अधिकारी, ननि।
इनका कहना है
–गुलौआताल के फुव्वारे फाउंटेन को चलाने का समय बढ़ा दिया गया है जिससे ताल के पानी में ऑक्सीजन लेवल सही बना रहे और मछलियों को नुकसान न पहुंचे। मछलियों की तालाब के अंदर मरने की वजह ऑक्सीजन लेवल कम होना ही है।
–कमलेश श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री, जल विभाग।
