
नईदिल्ली। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच टकराव अब कानूनी मोर्चे पर पहुंच गया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्रशासन के 19 जनवरी के पत्र को न्यायिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए यूपी सरकार को कानूनी नोटिस भेजा है और उसे 24 घंटे के भीतर वापस लेने का अल्टीमेटम दिया है।
कानूनी नोटिस में शंकराचार्य ने साफ किया है कि संबंधित पत्र न सिर्फ उनकी प्रतिष्ठा, सम्मान और गरिमा को आहत करता है, बल्कि उनके आर्थिक स्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाला भी है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि जिस विषय पर यह नोटिस जारी किया गया है, वह पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में प्रशासनिक हस्तक्षेप अदालत की गरिमा को चुनौती देने जैसा है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने चेतावनी दी है कि यदि तय समयसीमा में नोटिस वापस नहीं लिया गया तो अवमानना न्यायालय अधिनियम 1971 और संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा शंकराचार्य परंपरा की छवि धूमिल करने और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के आधार पर भी कानूनी कदम उठाने की बात कही गई है।
इस घटनाक्रम से साफ संकेत मिल रहे हैं कि मामला केवल प्रशासनिक पत्राचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह संवैधानिक अधिकारों, न्यायिक मर्यादाओं और धार्मिक परंपरा की प्रतिष्ठा से जुड़ा बड़ा कानूनी विवाद बनता जा रहा है।
