मुंबई, 19 जनवरी (वार्ता) वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम. नागराजू ने सोमवार को कहा कि सरकार और बीमा विनियामक ने विकास और बीमा की सुलभता को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत ढांचे और संरचनात्मक सुधारों को सक्षम बनाया है और देश में पुनर्बीमा कारोबार का क्षेत्र एक नये परिवर्तन के मुहाने पर है।
उन्होंने भारतीय बीमाकर्ताओं और पुनर्बीमाकर्ताओं को गिफ्ट सिटी के माध्यम से वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने और “2047 तक सभी के लिए बीमा” के लक्ष्य को प्राप्त करने के हेतु सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया ग।
श्री नागराजू यहां आयोजित अंतराष्ट्रीय वित्त केंद्र ( आईएफएस)- इरडाई-गिफ्टसिटी वैश्विक पुनर्बीमा शिखर सम्मेलन के तीसरे संस्करण को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत पुनर्बीमा क्षेत्र में परिवर्तनकारी विकास के मुहाने पर खड़ा है। भारत में कुल पुनर्बीमा बाजार का कारोबार 2024-25 में 1.12 लाख करोड़ रुपये रहा।
उन्होंने सम्मेलन के विषय “आज के भारत को जोड़ना, कल के भारत का बीमा करना – भारत विकास रोडमैप” को पूरी तरह से “2047 तक सभी के लिए बीमा” की सरकार की सोच के अनुरूप बताया। व्यक्तियों और इकाइयों को बीमा संरक्षण देने के साथ साथ अर्थव्यवस्था में बीमा क्षेत्र के बड़े योगदान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान देश में इस क्षेत्र ने 41.84 करोड़ पॉलिसियां जारी कीं, 11.93 लाख करोड़ रुपये का प्रीमियम एकत्र किया, 8.36 लाख करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया और 31 मार्च 2025 तक इस क्षेत्र के अंतर्गत प्रबंधनाधीन परिसम्पत्तियां 74.44 लाख करोड़ रुपये की थीं।
वित्तीय सेवा सचिव ने कहा कि सरकार और बीमा विनियामक इरडाई ने विकास और बीमा की सुलभता को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत ढांचे और संरचनात्मक सुधारों को सक्षम बनाया है। इस संदर्भ में उन्होंने बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा बढ़ाकर 100 प्रतिशत किये जाने , पिछले वर्ष एक नयी पुनर्बीमाकर्ता कंपनी के पंजीकरण और सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) अधिनियम, 2025 के अंतर्गत पॉलिसीधारक शिक्षा एवं संरक्षण कोष के गठन के प्रावधान तथा डेटा संरक्षण को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अनुरूप बनाये जाने का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि बीमा विनियामक इरडाई की विनियामक शक्तियों को सुदृढ़ किया गया है।
उन्होंने इस वैश्विक पुनर्बीमा शिखर सम्मेलन को वित्तीय सेवा क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाने वाला एक महत्वपूर्ण प्लेटफार्म बताया। उन्होंने कहा कि बीमा और पुनर्बीमा क्षेत्र देश भारत के आर्थिक लक्ष्यों की दिशा में प्रगति में अत्यंत महत्वपूर्ण निभा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को सुदृढ़ कर रहा है। चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद एक विशाल आबादी वाला भारत वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है तथा 2026 में 6.6 प्रतिशत अनुमानित वृद्धि के साथ विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
उन्होंने वैश्विक बीमा परिदृश्य पर वैश्विक पुनर्बीमा कंपनी स्विस री सिग्मा की वर्ष 2005 की दूसरी रिपोर्ट का हवाला देते कहा कि 2024 में मजबूत प्रदर्शन के बाद वैश्विक आर्थिक मंदी और अस्थिर नीतिगत माहौल के कारण वैश्विक बीमा उद्योग क्षेत्र में जीवन और गैर-जीवन दोनों खण्डों में प्रीमियम वृद्धि धीमी हो रही है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2024 में वर्तमान बाजार मूल्य पर प्रीमियम के परिमाण के आधार पर 1.8 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ विश्व का 10वां सबसे बड़ा बीमा बाजार बना रहा।
देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मुकाबले बीमा प्रीमियम के अनुपात के हिसाब से भारत में बीमा की पैठ 3.7 प्रतिशत रही, जिसमें जीवन बीमा 2.7 प्रतिशत और गैर-जीवन बीमा का हिस्सा एक प्रतिशत था। जबकि बीमा घनत्व (प्रति व्यक्ति प्रीमयम) मामूली रूप से बढ़कर 97 अमेरिकी डॉलर हो गया, जो महत्वपूर्ण अप्रयुक्त बाजार क्षमता का संकेत देता है।
श्री नागराजू ने उल्लेख किया कि आईएफएससीए अधिनियम, 2019 के तहत गिफ्ट सिटी इंटरनेशल फाइनेंशियल सर्विस सेंटर इस तरह के वैश्विक केंद्रों की टक्कर का है। यह बीमा कार्यालयों को विनियमित करता है तथा इसके प्रावधानों के तहत विदेशी पुनर्बीमा कंपनियां वहां शाखाएं स्थापित कर सकती है। इसी तरह आईएफएससी, विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड), घरेलू शुल्क क्षेत्रों और विदेशी बाजारों में पुनर्बीमा कारोबार को सुगम बनाता है।
