
इंदौर. शहर में कारों से लाखों रुपए की नकदी चोरी करने वाला गिरोह पुलिस की पकड़ से अब तक बाहर है. बीते कुछ महीनों में हुई दो बड़ी वारदातों के बाद भी आरोपियों तक नहीं पहुंच पाने से पुलिस की जांच पर सवाल उठने लगे हैं. दोनों मामलों में पुलिस को साउथ से सक्रिय किसी पेशेवर गैंग के शामिल होने की आशंका है, लेकिन अब तक ठोस सबूत हाथ नहीं लगे हैं.
पहली वारदात एमजी रोड थाना क्षेत्र के सिख मोहल्ला इलाके में हुई थी. शाजापुर जिले के किसान गोविंद और प्रवीण पाटीदार कार से इंदौर आए थे. चोइथराम मंडी में आलू प्याज बेचने के बाद वे 7 लाख रुपए नकद लेकर वापस लौटने की तैयारी कर रहे थे. इसी दौरान सामान खरीदने के लिए कार खड़ी की और कुछ देर में लौटे तो कार से नकदी गायब थी. मामले की जांच में पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिनमें कुछ संदिग्ध कार के पास घूमते नजर आए थे. पुलिस जांच में सामने आया कि वारदात का तरीका देश के दक्षिणी राज्यों में सक्रिय गैंग से मेल खाता है. इसी आधार पर पुलिस टीम को साउथ भेजा गया था, लेकिन वहां आरोपी अपने ठिकाने से फरार मिले. इसके बाद जांच की रफ्तार धीमी पड़ गई. दूसरी घटना एमआईजी थाना क्षेत्र में एबी रोड स्थित एक कार शोरूम के बाहर हुई थी, यहां गोल्डन सिटी निवासी रोहित पांचाल की कार से बदमाशों ने 9 लाख रुपए उड़ा लिए. इस मामले में भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी. जांच में दोनों वारदातों के पैटर्न एक जैसे पाए गए, जिससे एक ही गैंग के शामिल होने की आशंका और मजबूत हुई. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह बेहद शातिर है और रेकी के बाद वारदात को अंजाम देता है. फिलहाल दोनों मामलों की फाइलें खुली हैं और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं.
