मास्को, 17 जनवरी (वार्ता/स्पुतनिक) नार्वे में रूस के राजदूत निकोलाई कोरचुनोव ने रूसी सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती से बात करते हुए कहा कि आर्कटिक में रूस और चीन की तथाकथित ‘धमकी भरी मौजूदगी’ को डराने-धमकाने के बहाने के रूप में इस्तेमाल करने की पश्चिम की नीति गलत साबित हुई है और ग्रीनलैंड के संदर्भ में यह उनके अपने ही यूरोपीय समर्थकों के खिलाफ उलटी पड़ गयी है। कोर्चुनोव ने कहा, “कुछ यूरोपीय देश, जो उस क्षेत्र के बाहर हैं, आर्कटिक राज्यों के बीच असहमति का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि आर्कटिक में अपनी भूमिका और स्थिति मजबूत कर सकें।”
राजदूत ने यह भी कहा, “जिन देशों के पास जरूरी प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, वे ग्रीनलैंड में सैन्य मौजूदगी बनाकर इसकी भरपाई करने के लिए खास तौर पर उत्सुक हैं। इसमें उनके अपने आर्थिक हितों को सुरक्षित करना भी शामिल है।” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बार-बार कहा है कि ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बन जाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और चीन और रूस से ‘मुक्त विश्व’ की सुरक्षा के लिए इसकी रणनीतिक अहमियत का हवाला दिया। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों ने अमेरिका को द्वीप पर कब्ज़ा करने के खिलाफ चेतावनी दी है और कहा है कि वे अपनी साझा क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान चाहते हैं।
यह द्वीप 1953 तक डेनमार्क का उपनिवेश था। 2009 में स्वायत्तता मिलने के बाद भी यह ‘डेनमार्क किंगडम’ का हिस्सा बना रहा, जिसके पास स्व-शासन और अपनी आंतरिक नीतियां निर्धारित करने की शक्ति है।

