
जबलपुर। जस्टिस सुजॉय पॉल ने शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट नंबर एक आयोजित हुआ, जहां पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। जस्टिस पॉल पूर्व मुख्य न्यायाधीश टी एस शिवगणनम की सेवानिवृत्ति के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य कर रहे थे। उन्हें 18 जुलाई 2025 को कलकत्ता उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया गया था।
संयोग से हुई शुरुआत
मूलतः जबलपुर में पले बढ़े मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने शपथ ग्रहण के बाद अपने संबोधन में कहा कि, कानूनी पेशे में मेरी शुरुआत नियोजन से नहीं, बल्कि संयोग से हुई। उन्होंने कहा, किसी पारंपरिक पृष्ठभूमि के बिना, मैंने केवल कड़ी अनुशासन और वरिष्ठों तथा जिन न्यायाधीशों के समक्ष मैंने पेशी दी, उनके द्वारा मिले मार्गदर्शन के कारण इस कठिन पेशे में अपनी राह बनाई। उन्होंने कहा कि कोलकाता में आने के बाद से उन्हें बार के सदस्यों से पूरा सहयोग मिला है। मैं इस संस्था की पवित्रता और दक्षता बनाए रखने के लिए पूर्ण समर्पण से प्रयास करूंगा। बता दे कि मुख्य न्यायाधीश श्री पॉल ने पंडित एल. एस. झा मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की और रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर मध्य प्रदेश से स्नातक, परास्नातक तथा विधि की डिग्री प्राप्त की थी।
राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं मां
जस्टिस पॉल ने अपने भाषण में अपनी मां मंजुश्री पॉल के संघर्षों को भी याद किया, जो शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद थीं। उन्होंने कहा, मेरे पिता का निधन मेरी उम्र के मात्र 15 महीने में हो गया था। मेरे चरित्र की नींव मेरी मां ने रखी। उन्होंने बताया कि उनकी मां एक सरकारी स्कूल में सहायक शिक्षिका थीं और उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिला था। वे मेरी जीवन की पहली शिक्षिका ही नहीं, बल्कि मेरे स्कूल की क्लास टीचर भी थीं।
