
भोपाल। आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ तकनीक नहीं बल्कि भविष्य का महत्वपूर्ण रोजगार माध्यम है. यह कहना था नेशनल स्टार्टअप डे पर मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च के डेटा साइंस विभाग के प्रोफेसर डॉ आकाश अनिल का. कार्यक्रम में स्टार्टअप और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया था. जिसका विषय एआई इंडस्ट्री 4.0 टूल फॉर इनोवेटर्स एंड एंटरप्रेन्योर्स रहा. प्रोफेसर आकाश ने छात्रों को समझाते हुए कहा कि आने वाले समय में पारंपरिक करियर विकल्पों से आगे बढ़कर एआई आधारित कौशल और नवाचार असली पहचान देंगे. उन्होंने कहा उद्योग जगत में तेजी से बदलती मांगों के चलते छात्र अगर एआई, डेटा एनालिटिक्स और नई तकनीकों को अपनाएं तो रोजगार के अवसर कई गुना बढ़ सकते हैं. इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलगुरु डॉ रतन सूर्यवंशी ने कहा कि छात्रों को अब केवल सरकारी नौकरी की दौड़ तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि स्टार्टअप और उद्यमिता अपनाने से युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं और रोजगार के अवसर खुद तैयार कर सकते हैं. वहीं विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ सुशील मंडेरिया ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक मानवीय खोज है और मनुष्य से ज्यादा संवेदनशील या बुद्धिमान नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि एआई हमारी सहायता के लिए है और इसका सही उपयोग हमारे लिए नए अवसरों का मार्ग खोल सकता है. इस अवसर पर कार्यशाला संयोजक और विश्वविद्यालय इनक्यूबेशन सेल की इंचार्ज डॉ शुचि मिश्रा, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन केंद्र और मुद्रा वितरण विभाग की निर्देशक डॉ विभा मिश्रा, वरिष्ठ सलाहकार डॉ भारती शर्मा, डॉ संजय गुलाटी, डॉ मधुकर ईटेवार, डॉ प्रज्ञा ओझा सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, फैकल्टी सदस्य और अनेक छात्र उपस्थित रहे. कार्यक्रम का संचालन आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन केंद्र की वरिष्ठ सलाहकार डॉ निधि रावल गौतम ने किया.
