नई दिल्ली | 15 जनवरी, 2026: इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने आगामी बजट 2026 के लिए वित्त मंत्रालय को एक क्रांतिकारी सुझाव दिया है। इस प्रस्ताव के तहत विवाहित जोड़ों को अलग-अलग टैक्स भरने के बजाय ‘ज्वाइंट इनकम टैक्स रिटर्न’ फाइल करने का विकल्प देने की वकालत की गई है। वर्तमान में भारत में प्रति व्यक्ति आधार पर टैक्स वसूला जाता है, जिससे उन परिवारों पर बोझ अधिक होता है जहाँ केवल एक सदस्य कमाता है। इस बदलाव से भारत का टैक्स ढांचा अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देशों के समकक्ष आ जाएगा और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी।
अगर सरकार इस सुझाव को स्वीकार कर लेती है, तो बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट पति-पत्नी के लिए दोगुनी होकर 8 लाख रुपये हो सकती है। वर्तमान में व्यक्तिगत स्तर पर यह सीमा 4 लाख रुपये है। ज्वाइंट फाइलिंग का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यदि पत्नी गैर-कामकाजी है, तो पति उसके हिस्से की टैक्स छूट का लाभ भी उठा सकेगा। आईसीएआई का तर्क है कि इससे परिवारों की बचत बढ़ेगी और लोग टैक्स बचाने के लिए आय के कृत्रिम वितरण जैसे अवैध रास्तों को नहीं अपनाएंगे। साथ ही, 30 फीसदी वाला उच्चतम टैक्स रेट केवल 48 लाख रुपये से अधिक की संयुक्त आय पर ही लागू करने का सुझाव दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ज्वाइंट टैक्सेशन प्रणाली शुरू होने से संयुक्त संपत्ति (Joint Property) से जुड़े कर विवादों में भारी कमी आएगी। अक्सर प्रॉपर्टी पति-पत्नी के नाम होती है लेकिन फंडिंग एक ही व्यक्ति करता है, जिससे आयकर विभाग के नोटिस का खतरा रहता है। एकल रिटर्न फाइलिंग से न केवल कंप्लायंस का बोझ कम होगा, बल्कि विभाग का समय भी बचेगा। आईसीएआई ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था अनिवार्य के बजाय वैकल्पिक होनी चाहिए, ताकि करदाता अपनी सुविधा के अनुसार व्यक्तिगत या ज्वाइंट फाइलिंग चुन सकें।

