कमल हसन ‘जन नायकन’ के समर्थन में आए, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कम होने के संबंध में जतायी चिंता

नयी दिल्ली, 10 जनवरी (वार्ता) अभिनेता कमल हासन ने अभिनेता विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से प्रमाण पत्र नहीं मिलने के बाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया पर चिंता जताई है। श्री हासन ने किसी संस्था का नाम लिए बिना या किसी विशिष्ट फिल्म का जिक्र किए बिना कहा, “भारत का संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अधिकार देता है। यह क्षण किसी एक फिल्म से बड़ा है, यह उस स्थान को दर्शाता है, जो हम एक संवैधानिक लोकतंत्र में कला और कलाकारों को देते हैं।” अभिनेता ने कहा, “सिनेमा केवल एक व्यक्ति का श्रम नहीं है, बल्कि लेखकों, तकनीशियनों, कलाकारों, प्रदर्शकों और छोटे व्यवसाय करने वालों का सामूहिक प्रयास है, जिनकी आजीविका एक निष्पक्ष और समयबद्ध प्रक्रिया पर निर्भर करती है।”
श्री हासन ने पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर देते हुए चेतावनी दी कि सेंसरशिप के अस्पष्ट कामकाज रचनात्मकता को दबा सकती हैं और फिल्म उद्योग में आजीविका को क्षति पहुंचा सकती हैं। अभिनेता ने कहा, “जब स्पष्टता का अभाव होता है, तो रचनात्मकता सीमित हो जाती है, आर्थिक गतिविधियां बाधित होती हैं और जनता का विश्वास कमजोर होता है। अब प्रमाणन प्रक्रिया पर फिर से विचार करने, प्रमाणन के लिए समय निश्चित करने, मूल्यांकन को पारदर्शी बनाने और सुझाए गए प्रत्येक कट या संपादन के लिए लिखित व तर्कसंगत औचित्य देने की आवश्यक्ता है।”

श्री हासन ने फिल्म उद्योग से ‘एकजुट होने और सार्थक, रचनात्मक संवाद में शामिल होने’ का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के सुधार ‘रचनात्मक स्वतंत्रता की रक्षा करेंगे, संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखेंगे और अपने कलाकारों व लोगों पर विश्वास जताकर भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करेंगे।’
हासन की यह टिप्पणी थलपति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ से जुड़े विवाद की पृष्ठभूमि में आई है। शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय ने सीबीएफसी को फिल्म के लिए यू/ए 16 प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया, हालांकि बाद में सीबीएफसी द्वारा चुनौती देने के बाद इसकी सुनवाई के लिए 21 जनवरी का दिन तय किया गया है। फिल्म को सीबीएफसी से प्रमाणपत्र नहीं मिलने के कारण पोंगल के अवसर पर इसके रिलीज को स्थगित करना पड़ गया। तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के राज्य कानूनी विंग के संयुक्त समन्वयक इंद्र धनराज ने मीडिया से कहा, “यदि फिल्म समय पर प्रदर्शित नहीं होती है, तो यह लोगों के लिए एक बड़ा नुकसान होगा। वकीलों ने बताया कि 27 दृश्यों में कट लगाए गए हैं। अगर सीबीएफसी अपील के लिए जाती है, तो हम अदालत में उनका सामना करेंगे।”

इस बीच, फिल्म के निर्माता वेंकट नारायण ने एक वीडियो संदेश में कहा कि मामला अभी ‘विचाराधीन’ है। उन्होंने खुलासा किया कि फिल्म को शुरुआत में सीबीएफसी द्वारा सुझाए गए कुछ कट के बाद मंजूरी दे दी गई थी। श्री नारायण ने कहा, “हमारी नियोजित रिलीज से कुछ ही दिन पहले हमें सूचित किया गया था कि एक शिकायत के आधार पर फिल्म को पुनरीक्षण समिति के पास भेजा गया है। समय कम होने और शिकायतकर्ता का पता न होने के कारण हमने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया, लेकिन सीबीएफसी ने तुरंत इस फैसले को चुनौती दी। प्रमाणन जारी करने के आदेश पर रोक लगा दी गई है।” गौरतलब है कि एच. विनोद द्वारा निर्देशित और केवीएन प्रोडक्शंस के तहत वेंकट के. नारायण द्वारा निर्मित ‘जन नायकन’ को थलपति विजय की आखिरी फिल्म के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।

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